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गफलत में न रहे चीन
11 जून के दैनिक ट्रिब्यून में जी. पार्थसारथी का ‘चीन के मुकाबले में खड़ा मजबूत भारत’ लेख विश्लेषण करने वाला था। चीन का अपने कई पड़ोसी देशों के साथ सीमा विवाद चल रहा है। कहना न होगा कि भारत अमेरिका, जापान, वियतनाम, इंडोनेशिया आदि देशों के साथ चीन के खिलाफ सैनिक तालमेल कर रहा है, जिसे चीन पसंद नहीं करता। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय चीन के खिलाफ है। वहीं पश्चिमी देशों की बहुत सारी कंपनियां चीन से भारत की ओर रुख कर रही हैं। भारत में चाइनीज चीजों का बहिष्कार का माहौल जोर पकड़ता जा रहा है जो कि चीन के लिए एक बहुत बड़ा झटका होगा। चीन भारत को बार-बार 1962 की याद दिलाता रहता है, लेकिन चीन को यह भी पता है कि यह नया भारत है। उसे किसी गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए।
शामलाल कौशल, रोहतक
अकर्मण्यता का वायरस
11 जून के दैनिक ट्रिब्यून का संपादकीय ‘श्रमिकों की सुध’ प्रवासी श्रमिकों को उनके गृह राज्यों में पहुंचाने के लिए सत्ताधीशों को फटकार लागने वाला था। जिस किस्म की त्रासदी प्रवासी श्रमिकों को सरकार द्वारा बिना किसी पूर्व नियोजित कार्यक्रम न होने के कारण सहनी पड़ी है वह कष्टदायक साबित हुई है। कोरोना वायरस महामारी के मद्देनजर इन प्रवासी मजदूरों का किसी प्रकार से ध्यान नहीं रखा गया। शर्म की बात है जो काम सत्ताधारी राजनेताओं को करना चाहिए था उसके लिए सुप्रीम कोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा।
अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल
पाक की बौखलाहट
पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आता। पिछले 5 दिनों में सुरक्षा बलों ने 14 आतंकियों को मार गिराया है, जिससे आतंक की फैक्टरी चलाने वाला पाकिस्तान बौखला गया है। सीमा पर संघर्ष विराम का उल्लंघन कर मोर्टार दाग रहा है, जिससे नागरिकों को भी मुसीबत का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय सेना को इसका पक्का इलाज करना ही होगा।
विजय महाजन प्रेमी, रोहिणी, दिल्ली
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