एकदा
सीख को जीना
स्वामी रामदास जी गांव-गांव जाकर प्रवचन देते थे। उनके भक्त रस ले लेकर उनकी बातों को सुनते थे और उसका पालन भी करते थे। एक दिन वह एक नए गांव में पहुंचे। संध्या समय जब वह प्रवचन कर रहे थे तो दो शरारती युवक वहां पहुंचे और तरह-तरह से शरारतें करके सभा में व्यवधान उत्पन्न करने लगे। उसके बाद भजन, कीर्तन में भी शोर मचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। गांव वाले उनके स्वभाव से परिचित थे अतः उनके डर से कोई कुछ नहीं बोल रहा था। जब कई दिन ऐसे ही बीत गए और वह स्वामी जी को क्रोध नहीं दिला पाए तो वह लज्जित होकर स्वामी जी से बोले—स्वामी जी, हम आपको और आपके भक्तों को इतना परेशान करते हैं, परंतु आप सदा मुस्कुराते ही रहते हैं। क्या आपको कभी क्रोध नहीं आता। स्वामी जी मुस्कुराते हुए कहने लगे—मेरे बच्चों, यदि मैं स्वयं पर ही नियंत्रण न रख सकूं, तो फिर तुम सबको क्या सिखा पाऊंगा। मेरा आत्मबल और स्वयं पर नियंत्रण ही तुम जैसे भटके हुए युवकों को सद्मार्ग पर लाता है।
प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन
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