बांके ने चुनी बंकर की राह
सहीराम
ट्रंप साहब चीन से लड़ते-लड़ते अपनों से ही लड़ बैठे। उन्हें लगा था कि चीन से लड़ेंगे तो अपनों के करीब आएंगे। यह ठीक है कि वे मोदीजी के मित्र हैं और उनसे मुत्तासिर भी बहुत हैं। इतने कि उन्हें जेंटलमैन मानते हैं। लेकिन हम तो भाई उन्हें धाकड़ मानते हैं। जेंटलमैन मानकर क्या करेंगे? जेंटलमैन तो एक मनमोहन सिंह थे न। अर्थशास्त्री भी थे। पर हमने अर्थशास्त्री नहीं, चायवाला चुना। इसी तरह हमने जेंटलमैन नहीं, धाकड़ चुना। इसके बाद तो वे कभी फकीर हुए, कभी चौकीदार हुए, कभी पिछड़े भी हुए, कभी गरीब हुए, वे सब हुए, पर वे धाकड़ हमेशा रहे। ट्रंप भी अपने को खूब धाकड़ दिखाते हैं। इस चक्कर में वे मोदीजी की पूरी तरह नकल ही करने लगे। लेकिन भैया कहते हैं कि नकल में भी अकल की जरूरत होती है। यह ट्रंप साहब ने गौर नहीं किया, मोदीजी पाकिस्तान को धमकाते हैं, चीन को नहीं धमकाते। चीनी राष्ट्रपति के साथ तो वे साबरमती तट पर झूला झूलते हैं। ट्रंप साहब को लगा कि जैसे मोदीजी पाकिस्तान को धमकाते हैं और चुनाव जीत जाते हैं, वैसे ही वह भी चीन को धमकाएंगे और चुनाव जीत जाएंगे। पर अब चीन वाले संतुष्ट हैं, उनका झंझट खत्म हुआ। अब अमेरिकी खुद ही निपट लेंगे ट्रंप से।
अब देख लो व्हाइट हाउस तक चीनी नहीं पहुंचे हैं। अमेरिकी ही पहुंचे हैं। वहां चीन वाले बम और गोले नहीं गिरा रहे, खुद अमेरिका वाले ही ईंट-पत्थर फेंक रहे हैं, खाली बोतलें फेंक रहे हैं। दंगे अमेरिका में भी होते हैं। दंगे होते हैं तो लूटपाट वहां भी होती है। पर वहां पुलिस घुटनों के बल बैठकर लोगों से क्षमाप्रार्थी है। पुलिस अधिकारी ट्रंप से कह रहे हैं कि भैया अगर दो अच्छे बोल बोलना नहीं आता है तो बोलने के लिए डॉक्टर ने थोड़े ही बोला है, चुप रह जाओ। लेकिन ट्रंप का मुंह है कि बंद ही नहीं हो रहा। वह गोरों की तारीफ कर रहे हैं, पुलिस की तारीफ कर रहे हैं। बात वही है न कि नकल में भी अकल की जरूरत पड़ती है। पिछले दिनों सीएए विरोधी आंदोलन के वक्त मोदीजी और शाहजी ने पुलिस की तारीफ क्या कर दी कि ट्रंप भी पुलिस की तारीफ करने लगे। अब बड़े भैया को कौन समझाए कि भैया हमारे यहां तो सब चलता है। पुलिस लोगों को भी पीट लेती है और खाली पेट पैदल अपने गांव को निकले गरीबों को भी और फिर भी तारीफ पा जाती है। पर वह अमेरिका है। पुलिस की तारीफ का नतीजा देख लिया ना, बंकर में छुपना पड़ा। कभी अमेरिका दुनियाभर के तानाशाहों को बंकरों में छुपने को मजबूर कर दिया करता था, आज खुद अमेरिका का राष्ट्रपति बंकर में छुपने को मजबूर है। जनता को भी तो ध्यान रखना चाहिए न चुनते हुए, कि किसे चुन रहे हैं। किसी बड़बोले, हेकड़ीबाज और मूर्ख को क्यों चुनें?
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