हिजबुल कमांडर का सफाया बड़ा संदेश
कोरोना संकट के चलते लॉकडाउन को कामयाब बनाने में जुटे सुरक्षाबलों को सॉफ्ट-टारगेट बनाने वाले पाक पोषित आतंकियों को बुधवार को टॉप हिजबुल कमांडर की मौत का बड़ा झटका है। बारह लाख के इनामी खूंखार आतंकवादी रियाज नाइकू शीर्ष आतंकवादियों में शामिल था और तमाम हमलों की घटनाओं में वांछित था। रियाज मारे गये आतंकवादियों के जनाजे में स्वचालित हथियारों से खुलेआम फायरिंग किया करता था। हाल में हंदवाड़ा में दो बड़े सैन्य अधिकारियों समेत पांच की हत्या तथा सोमवार को घात लगाकर तीन सीआरपीएफ के जवानों की हत्या के बाद पिछले चौबीस घंटे में रियाज नाइकू समेत चार आतंकवादियों का मारा जाना सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ाने वाला है। दरअसल, लॉकडाउन में विभिन्न स्थानों पर कानून व्यवस्था कायम करवाने वाले सुरक्षा बलों को आतंकवादी सॉफ्ट-टारगेट बना रहे हैं। हालांकि, कश्मीर में जनवरी से अब तक सुरक्षा बलों की कार्रवाई में 76 आतंकी मारे जा चुके हैं, मगर बीस जवानों को भी गंवाना पड़ा है। विडंबना यह है कि पांच अगस्त के बाद जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद-370 के समाप्त किये जाने से बौखलाया पाक एलओसी पर लगातार सीजफायर का उल्लंघन कर रहा है और फायरिंग की आड़ में घुसपैठियों को भारत भेजने की कोशिश करता रहा है। केरन सेक्टर में पांच घुसपैठियों के मारे जाने और बड़ी मात्रा में गोला-बारूद बरामद होना उसकी करतूतों का नमूना है। बहरहाल, रियाज नाइकू के मारे जाने के बाद घाटी में उपद्रव को टालने के लिए मोबाइल व इंटरनेट सेवायें बंद कर दी गईं। आतंकवादियों के जनाजे के बाद उपद्रव की आशंका को टालने के लिए अब सुरक्षा बलों ने आतंकवादियों के शव को परिजनों को न सौंपने का निर्णय करके नियम बदल दिया है। दरअसल, इस दौरान आतंकवादी लोगों को भड़काने का काम करते थे। नई नीति से राज्य में कानून व्यवस्था को बनाये रखने में सुविधा हो सकेगी। ऐसा इसलिये भी जरूरी था क्योंकि मार्च के बाद राज्य में आतंकवादी हमलों में खासी तेजी आयी है।
निस्संदेह चौबीस घंटों में सुरक्षा बलों की आठ जानें गंवाने के बाद चार आतंकवादियों का सफाया जवानों का मनोबल बढ़ायेगा। चिंता की बात यह है कि अब एक बार फिर उत्तर कश्मीर आतंकवादियों का कार्यक्षेत्र बनता जा रहा है। नब्बे के दशक में भी यह इलाका आतंक का गढ़ हुआ करता था, जिसका सफाया 1995 में हुआ। दरअसल, यह क्षेत्र पाक द्वारा लीपा वैली में आतंकवादियों की घुसपैठ कराने के बाद बीच में पड़ता है, जिसके बाद स्थानीय आतंकवादियों की मदद से वे यहां सक्रिय हो जाते हैं या फिर छोटे-छोटे समूहों में दक्षिण कश्मीर में चले जाते हैं। सुरक्षा बल स्वीकार कर रहे हैं कि पिछले दिनों कुछ घुसपैठिये भारत में घुसने में कामयाब हुए हैं। दरअसल, पाकिस्तान कश्मीर में मुश्किलें पैदा करने के लिए पुरजोर कोशिश में लगा है। तीन मई को हंदवाड़ा में सुरक्षा बलों के जो पांच लोग मारे गये, उस हमले का सूत्रधार लश्कर का कमांडर हैदर पाकिस्तानी नागरिक था। हालांकि, सुरक्षा बल इस चुनौती से मुकाबले को हरदम चौकस रहते हैं, मगर हंदवाड़ा में नागरिकों को बचाने के फेर में आतंकवादियों के जाल में फंस गये। यद्यपि, अप्रैल माह में सुरक्षाबलों ने 20 मुठभेड़ों में कोई क्षति नहीं उठायी थी। दरअसल, हताश पाकिस्तान इन करतूतों के पीछे बड़ी भूमिका निभा रहा है। इस साल अब तक 650 बार एलओसी पर सीजफायर का उल्लंघन कर चुका है। इसके बावजूद सुरक्षाबलों को आतंकवादियों के सफाये के लिए रणनीति में बदलाव लाना होगा, ताकि सुरक्षाबलों की मानवीय क्षति और सिक्योरिटी ग्रिड को भी नुकसान न हो। साथ ही कश्मीर में नागरिक संपर्क अभियान को बढ़ावा देकर राष्ट्रीयता का भाव जगाना होगा, ताकि स्थानीय युवक आतंकवादियों के मोहरे न बनें। दरअसल, महज सुरक्षाबलों की कार्रवाई ही आतंकवाद का समाधान नहीं है, इसके लिए राजनीतिक-सामाजिक स्तर पर भी प्रयास जरूरी हैं। खासकर युवाओं को रचनात्मक अभियानों से जोड़कर रोजगार के नये अवसर उपलब्ध कराने होंगे।

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