जन संसद
जनता कर्फ्यू की सार्थकता
मनोबल बढ़ाया
देश के प्रधानमंत्री मन, वचन और कर्म से हर समय देश तथा जनता के हित के बारे में सोचते हैं। वजह है कि अधिकांश जनता इन पर विश्वास करती है। जनसंख्या घनत्व अधिक होने तथा सीमित साधनों के कारण देश में कोरोना से अत्याधिक विनाश की आशंका को समझते हुए प्रधानमंत्री ने बड़ी सूझबूझ एवं आत्मविश्वास के साथ जनता कर्फ्यू के रूप में देशवासियों का मनोबल बढ़ाया। नि:संदेह लाॅकडाउन के लिए तैयार करने के लिए जो निर्णय लिया वह अद्वितीय है। वे जानते हैं कि संयम और संकल्प के द्वारा ही इस महामारी को हराया जा सकता है।
एम.एल. शर्मा, कुरुक्षेत्र
कुशल नेतृत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने जनता कर्फ्यू वाले तर्कसंगत प्रयास से एक बहुत बड़ा सन्देश दिया। क्योंकि 24 घंटे का ब्रेक किसी भी वायरस के लिए बहुत बड़ा पीरियड होगा। यदि इसे नये माध्यम या इनसानी शरीर न मिलें तो पार्क, एयरपोर्ट, बस, ट्रेन टर्मिनल, आदि सार्वजनिक स्थलों पर गलती से भी संक्रमण फैला हो तो वह स्वतः ही समाप्त हो जाएगा। जनता के सहयोग के बिना इस वैश्विक महामारी से लड़ना सरकारों के बस में नहीं है। लेकिन इस सबका श्रेय प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व को जाता है। सावधानी भी हमारी, सुरक्षा भी हमारी ही होगी।
मंगलेश सोनी, धार, म.प्र.
अद्भुत मिसाल
कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री के आह्वान पर जनता ने जो धैर्य और अनुशासन का परिचय दिया, वह अद्भुत मिसाल है। यह दुनिया के लिए अनुकरणीय उदाहरण के साथ संदेश भी है कि भारत की जनता धैर्य का परिचय देना अच्छे से जानती है। यह सब प्रधानमंत्री की एक अपील पर हुआ जो उनकी नेतृत्व क्षमता को मजबूत करता है। इस समय सभी का सहयोग भी राष्ट्रभक्ति की पहचान होती है। नि:संदेह लड़ाई लंबी व कठिन है लेकिन कुशल नेतृत्व के बल पर भारत इसमें अवश्य विजयी होगा।
सोहन लाल गौड़, कलायत, कैथल
सामूहिक संकल्प
देश की जनता ने प्रधानमंत्री की अपील पर जनता कर्फ्यू के दौरान जिस तरह खुद को अपने घरों तक सीमित रखा, वह सामूहिक संकल्प शक्ति की अद्भुत मिसाल थी। भारत की जनता धैर्य का परिचय देना अच्छी तरह से जानती है। यह सब प्रधानमंत्री की नेतृत्व क्षमता का ही कमाल है कि जब उन्हें लगा की यह कोरोना वायरस बगैर लॉकडाउन करे काबू में नहीं आने वाला तो उन्होंने तुरंत निर्णय लिया। इस ऐतिहासिक और साहसिक फैसले का पूरा देश पालन कर रहा है। कोरोना वायरस संकट से आज पूरा विश्व जूझ रहा है। कड़ा अनुशासन और आत्मसंयम ही इस संकट से हमारे देश और विश्व को विजय दिलाएगा।
प्रदीप कुमार दुबे, देवास, म.प्र.
दूरदर्शी नेतृत्व
प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू के आह्वान को देशभर में सकारात्मक प्रतिसाद मिला। प्रधानमंत्री ने लोगों के दिलों को छू लिया। लोगों को प्रधानमंत्री के नेतृत्व में पूर्ण विश्वास है। लोगों ने विश्वास किया कि कोरोना वायरस से बचने का उपाय केवल अपने घरों में रहें। इसका मकसद यह है कि लोग एक-दूसरे के संपर्क में न आएं। उन्होंने कहां कि आप अपने घर के आगे लक्ष्मण रेखा खींचे, जिसे आप पार न करें ताकि आप एक-दूसरे से संपर्क न कर सके। यह सब प्रधानमंत्री के कुशल तथा दूरदर्शी राजनीतिक नेतृत्व का ही प्रभाव है।
शामलाल कौशल, रोहतक
एकता का प्रदर्शन
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कर्फ्यू के लिए हुंकार भरी थी, इसमें लोगों ने अपना भरपूर योगदान भी दिया। लोगों ने स्वेच्छा से खुद को संयमित भी किया। यह प्रधानमंत्री के कुशल नेतृत्व को दर्शाता है कि देश का आमजन इस महामारी से लड़ने के लिए उनके साथ एकजुट है। लेकिन उसी दिन सायं कुछ जगहों पर लोगों ने गली-मोहल्ले में भीड़ इकट्ठी कर ताली-थाली बजाकर गलत कर दिया। लोगों को चाहिए की कभी भी किसी भी मौके पर तब तक भीड़ न जुटाए, जब तक कोरोना वायरस का बुरा दौर खत्म नहीं हो जाता। सरकार, प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन किया जाए।
राजेश कुमार चौहान, जालंधर
एकजुटता की जीत
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘जनता कर्फ्यू’ के आह्वान पर देश की जनता ने राष्ट्रभक्ति का जज्बा दिखाते हुए अपने घरों तक सीमित रहे। खुद को संयमित, समर्पित करके एकजुटता का तो परिचय दिया ही, साथ ही कोरोना वायरस को हराने के लिए सकारात्मक और रचनात्मक पहल दिखाते हुए दुनिया को यह दिखा दिया कि जब भी देश पर संकट की घड़ी आती हैं तो यह देश एकजुट होकर उसके खिलाफ अपनी लड़ाई लड़ता है और जीतता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन से लेकर दुनिया की महाशक्तियों ने यह माना है कि भारत किसी भी तरह की लड़ाई लड़ने में सक्षम है। देश की जनता ने सक्षम नेतृत्व के मार्गदर्शन में वायरस को हराने का दृढ़ निश्चय और संकल्प से हासिल कर लिया।
सुनील कुमार महला, पटियाला, पंजाब
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