मिथ्या तथ्यों पर आधारित है याचिका
नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (एजेंसी)
कोरोना वायरस महामारी से निपटने के लिये ‘पीएम केयर्स कोष’ बनाने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए निरस्त कर दिया कि यह मिथ्या तथ्यों पर आधारित है। चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस एमएम शांतानागौडर की 3 सदस्यीय पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा की याचिका सुनी और खारिज कर दी।
पीठ याचिकाकर्ता शर्मा की इन दलीलों से सहमत नहीं थी कि इस कोष की स्थापना अनुच्छेद 266 और 267 में प्रदत्त योजनाओं का अनुसरण किये बगैर ही की गयी है।
जमीयत से कहा, प्रेस का गला नहीं दबाएंगे
कोरोना महामारी फैलने को हालिया निजामुद्दीन मरकज की घटना से जोड़कर कथित रूप से सांप्रदायिक नफरत फैलाने से मीडिया के एक वर्ग को रोकने के लिए मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश देने से सोमवार को इनकार कर दिया। न्यायालय ने कहा कि वह प्रेस का गला नहीं घोटेगा। पीठ ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई की और कहा कि भारतीय प्रेस परिषद को भी पक्षकार बनाया जाये। केस दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिये सूचीबद्ध किया गया है।
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