वाशिंगटन, 24 अप्रैल (एजेंसी)
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घातक कोरोना वायरस को मारने के लिए कोरोना के मरीजों के शरीर के भीतर जीवाणुनाशक डालने या उनमें पराबैंगनी किरणों का ‘प्रवेश’ कराने का अध्ययन करने की संभावना की सलाह दी है, जिसकी अमेरिकी स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने तत्काल आलोचना की और लोगों से इस ‘खतरनाक’ सलाह पर ध्यान नहीं देने को कहा। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विषय पर गृह सुरक्षा मंत्रालय के उपमंत्री बिल ब्रायन ने अपने विभाग के हालिया वैज्ञानिक अध्ययन की जानकारी देते हुए ट्रंप की मौजूदगी में संवाददाताओं को बताया कि कोरोना वायरस धूप एवं नमी के संपर्क में आने से बहुत तेजी से खत्म होता है। सीधी धूप से यह जल्दी मरता है। आइसोप्रोपाइल अल्कोहल तो 30 सैकेंड में इसका खात्मा कर सकता है।
ब्रायन की इस टिप्पणी के बाद ट्रम्प ने सवाल किया कि क्या कोरोना से संक्रमित व्यक्ति के शरीर में इंजेक्शन से रसायन डाले जाने की संभावना है, जिससे यह वायरस मर जाए। यह अध्ययन करना दिलचस्प होगा। उनके इस बयान की स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आलोचना की ‘न्यूयॉर्क-कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर’ में आपात चिकित्सा के लिए वैश्विक स्वास्थ्य निदेशक क्रेग स्पेंसर ने कहा, ‘मेरी चिंता यह है कि लोग मर जाएंगे। लोग सोचेंगे कि यह अच्छा विचार है…यह खतरनाक है।’ व्हाइट हाउस में कोरोना वायरस कार्य बल के सदस्य डॉ. स्टीफन हान ने कहा, ‘मैं जीवाणुनाशकों को शरीर के भीतर डालने की सलाह निश्चित ही नहीं दूंगा।’ ‘कोलंबिया यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में आपात चिकित्सा के सहायक प्रोफेसर दारा कास ने कहा, ‘अपनी लार से कोरोना को हटाने के लिए कृपया ब्लीच या आइसोप्रोपाइल अल्कोहल नहीं पीएं।…‘यह भयानक है।’

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