जेब में नहीं रुपये, घर में नहीं बचा खाने का सामान
तरुण जैन/निस
रेवाड़ी, 2 अप्रैल
लॉकडाउन के चलते जिला में बनाये गए राहत शिविरों में जहां प्रवासियों को भोजन व रहन-सहन की सुविधा मिली हुई है। वहीं धारूहेड़ा के नंदरामपुर बास रोड पर रोके गए प्रवासियों की स्थिति इससे बिल्कुल उलट है। इन प्रवासियों की कोई खैर-खबर लेने वाला नहीं है और वे रोटी के मोहताज बने हुए हैं। मात्र पानी पीकर पेट ही दिन गुजार रहे हैं। दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि अब न उनकी जेब में पैसा है और ना ही घर में कुछ खाने का सामान बचा है।
मजदूर सुनीता, होशियार, राम सांवर, चंद्रभान यादव, संतोष, आराधना सिंह आदि ने कहा कि जब से लॉकडाउन शुरू हुआ है, उन पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। दिहाड़ी से वे परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। जब वे पलायन कर अपने घर जाने लगे तो यहां के लोगों ने भोजन उपलब्ध कराने का आश्वासन देकर रोक लिया था। लेकिन उन्हें प्रशासन की ओर से आज तक कोई मदद नहीं मिली। उनकी जेब में पैसे नहीं हैं।
ग्रामीण दे रहे पहरा
नारनौल (हप्र) : ग्राम पंचायत तोबड़ा के ग्रामीण कोरोना महामारी के चलते बाहर से आने वाले लोगों को गांव में प्रवेश नहीं करने दें रहे है तथा गांव के लोगों के बाहर जाने का कारण पूछ रहे हैं। जरूरी काम न होने पर उन्हें वापिस घर भेज दिया जाता है। ग्रामीण युवाओं के साथ चौकीदार की ड्यूटी भी लगा रखी है ताकी बाहर से आने वाले व्यक्ति आसानी से ठहर सके। ग्रामीणों का यह तरीका सबको अच्छा लग रहा है। गांव के सरपंच रामसिंह ने बताया कि बहारी व्यक्ति को गांव में अंदर आने से रोका जा रहा है। साथ में ग्रामीणों को भी विशेष काम होने पर गांव से बाहर जाने दिया जा रहा है।
लॉक डाउन में भी आतिशबाजी, भेेजा नोटिस
सोनीपत (हप्र) : वायरस को फैलने से रोकेन के चलते देशभर में लॉकडाउन किया गया है। इसके बावजूद गांव जठेड़ी में काफी देर तक आतिशबाजी करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आतिशबाजी करने वाले युवक के खिलाफ निवारक कार्रवाई की है। आतिशबाजी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पुलिस को दी शिकायत में एचसी राजेश ने बताया कि गांव जठेड़ी में काफी देर तक आतिशबाजी होती रही। इससे गांव में शांति भंग होने के साथ ही वातारवरण भी प्रदूषित हुआ हुआ है। उन्होंने मामले को लेकर गांव जठेड़ी के युवक के खिलाफ निवारक कार्रवाई की है।
प्रवासी श्रमिकों की हो रही काउंसलिंग
बहादुरगढ़ (निस) : लॉकडाउन में अस्थाई शेल्टर होम जहां प्रवासी श्रमिकों व जरूरतमंद लोगों के लिए आसरा बने हुए हैं वहीं सामाजिक कुरीतियों से लड़ने की अलख भी इन शेल्टर होम में जगाई जा रही है। उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने जिला में बनाए गए अस्थाई शेल्टर होम में समाज कल्याण एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से काउंसर द्वारा जागरूक करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। शहर की अग्रवाल धर्मशाला व छोटूराम धर्मशाला में बने शेल्टर होम में ड्रग डिएडिक्शन सेंटर से काउंसलर छोटूराम व सुनीता ने बृहस्पतिवार को विस्तार से प्रवासी श्रमिकों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ एकजुट होकर लडऩे में वे भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे तो किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं फैल सकती।
प्रवासी श्रमिकों की हो रही काउंसलिंग
बहादुरगढ़ (निस) : लॉकडाउन में अस्थाई शेल्टर होम जहां प्रवासी श्रमिकों व जरूरतमंद लोगों के लिए आसरा बने हुए हैं वहीं सामाजिक कुरीतियों से लड़ने की अलख भी इन शेल्टर होम में जगाई जा रही है। उपायुक्त जितेंद्र कुमार ने जिला में बनाए गए अस्थाई शेल्टर होम में समाज कल्याण एवं अधिकारिता विभाग के माध्यम से काउंसर द्वारा जागरूक करने के दिशा-निर्देश दिए हैं। शहर की अग्रवाल धर्मशाला व छोटूराम धर्मशाला में बने शेल्टर होम में ड्रग डिएडिक्शन सेंटर से काउंसलर छोटूराम व सुनीता ने बृहस्पतिवार को विस्तार से प्रवासी श्रमिकों को नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ एकजुट होकर लडऩे में वे भी सक्रिय भागीदारी निभाएंगे तो किसी भी प्रकार की बीमारी नहीं फैल सकती।
‘किसानों की फसल समय पर खरीदे सरकार’
नूंह/मेवात (निस) : हरियाणा सीएलपी डिप्टी लीडर व नूंह से कांग्रेसी विधायक आफताब अहमद ने राज्य की गठबंधन सरकार से मांग करते हुए कहा कि मेवात सहित पूरे प्रदेश के किसानों की फसल को समय पर ही खरीदा जाये नहीं तो किसानों के लिए बड़ी समस्या उत्पन हो जाएगी। आफताब अहमद ने मांग की है कि प्रति एकड़ 10 हजार रूपए अलग से किसान को उसकी फसल के भुगतान के साथ दिया जाये। उन्होंने कहा कि उन्हें कई किसानों ने बताया कि पैसे की भारी किल्लत है। फसल में पहले ही प्राकृतिक आपदा से नुकसान हो गया अब लॉकडाउन से सब कुछ ठप हो गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को काफी आर्थिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
273 कैदियों को रिहाई का इंतजार
बल्लभगढ़ (निस) : सरकार की पहल पर कोरोना वायरस के खतरे को कम करने के उद्देश्य से जिला जेल के कैदियों को पैरोल पर रिहा किया जा रहा है। नीमका जेल 116 बंदी अंतरिम जमानत पर चार दिन पहले छोड़े जा चुके हैं। 35 कैदी सोमवार को छोड़ दिए गए। अब जेल में 273 ऐसे कैदी हैं जो अपने स्वजनों के आने का इंतजार कर रहे हैं। सूचना देने के बावजूद इनके परिजन अभी तक जेल नहीं पहुंचे हैं। जेल में बंद कैदी को विशेष पैरोल देने के लिए उसके स्वजनों की ओर से दो जमानती बांड देने पड़ते हैं। जमानती बांड की राशि जिला मजिस्ट्रेट तय करते हैं। जमानत के तौर पर प्रॉपर्टी या किसी वाहन के कागजात भी जमा कराने पड़ते हैं। अगर तय समय बाद पैरोल से कैदी वापस जेल नहीं आता तो उसके प्रॉपर्टी या वाहन को जब्त किया जा सकता है। दरअसल नीमका जेल में काफी ऐसे कैदी भी हैं जिनके स्वजनों को डर है कि यह पैरोल के बाद शायद वापस जेल नहीं जाएगा। इतना ही नहीं ऐसे कैदी बाहर आकर किसी और वारदात को अंजाम दे सकते हैं। इसके अलावा यह भी हो सकता है कि कैदी के स्वजनों के पास जमानती बांड का इंतजाम न हो रहा हो। यही कारण है कि अधिकतर स्वजन जमानती बांड के लिए आगे नहीं आ रहे हैं। पूर्व में ऐसे काफी मामले भी सामने आए हैं जिनमे पैरोल पर गए कैदी वापस नहीं आए।
इसलिए स्वजन सतर्क हैं और कोई जोखिम भी नहीं लेना चाहते।
क्या कहते है जेल अधीक्षक
जेल अधीक्षक संजीव कुमार का कहना है कि नीमका जेल से 47 कैदी पहले से ही पैरोल पर चल रहे हैं। इनकी छह सप्ताह की पैरोल और बढ़ा दी गई है। जबकि 116 बंदियों को चार दिन पहले छोड़ दिया था। 35 कैदियों को सोमवार को पैरोल दे दी गई। इनके स्वजन जमानती बांड भर गए हैं। अब 273 कैदियों के स्वजनों के आने का इंतजार हो रहा है। हमारी कोशिश है कि जल्द से जल्द कैदियों को पैरोल देकर बाहर भेज दिया जाए।
The post जेब में नहीं रुपये, घर में नहीं बचा खाने का सामान appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.
from दैनिक ट्रिब्यून https://ift.tt/2UYv71y
via Latest News in Hindi
0 Comments