100 साल पुरानी है तबलीगी जमात
नयी दिल्ली, 1 अप्रैल (एजेंसी)
कोरोना के बीच चर्चा में आयी तबलीगी जमात की शुरुआत लगभग 100 साल पहले देवबंदी इस्लामी विद्वान मौलाना मोहम्मद इलयास कांधलवी ने एक धार्मिक सुधार आंदोलन के रूप में की थी। जमात का काम धार्मिक उपदेश देना है। गैर-राजनीतिक इस जमात का मकसद पैगंबर मोहम्मद के बताये गये इस्लाम के 5 बुनियादी अरकान (सिद्धातों) कलमा नमाज, इल्म-ओ-जिक्र (ज्ञान), इकराम-ए-मुस्लिम (मुसलमानों का सम्मान), इखलास-एन-नीयत (नीयत का सही होना) और तफरीग-ए-वक्त (दावत व तबलीग के लिए समय निकालना) का प्रचार करना है। दक्षिण एशिया में जमातों से 15 से 25 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। इसके सदस्यों को छोटे समूहों में बांटा गया है। हर समूह का एक मुखिया ‘अमीर’ कहलाता है। ये समूह चुनींदा जगहों पर मुसलमानों को इस्लाम के बारे में बताते हैं।
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