पुरुषोत्तम शर्मा
घर पर पीजी बनाने के लिए कई तरह की मंजूरी और नियम-कायदों का पालन करना जरूरी होता है, लेकिन सोनीपत शहर में सैकड़ों ऐसे पीजी चल रहे हैं, जिनके पास किसी तरह की न तो मान्यता है और न ही ये नियम-कायदों का पालन कर रहे हैं। ये पीजी में रहने वालों की जिदंगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। कई पीजी की इमारत तो ऐसी हैं कि यहां किसी तरह का आवास चलाया ही नहीं जा सकता है। बावजूद इसके लंबे अरसे से यहां पीजी काम कर रहे हैं।
सोनीपत को शैक्षणिक नगरी के रूप में जाना जाता है। ऐसे में यहां दर्जनों ऐसे बड़े संस्थान हैं, जहां हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ने के लिए आते हैं। इन संस्थानों के पास अपनी हॉस्टल की सुविधा सीमित है। इसी तरह, बहुत सारे कामकाजी लोग भी अपने घरों से दूर होने से ऐसे ठिकाने की तलाश करते हैं, जहां रहने और खाने दोनों की व्यवस्था मिल जाए। इसके चलते पीजी की परंपरा और यह कारोबार फला-फूला। सोनीपत में 300 से अधिक पीजी चल रहे हैं। लेकिन इनमें से अधिकतर बिना नियम कायदे के चल रहे हैं। इनमें से ज्यादातर ने पंजीकरण भी नहीं कराया है। नियम यह है कि पीजी संचालित करने के लिए सबसे पहले नगर निगम या परिषद में पंजीकरण कराना होता है।

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