किया ह्यूस्टन, 29 मार्च (एजेंसी)
अमेरिका के ह्यूस्टन के एक प्रमुख अस्पताल ने कोरोना से ठीक हुए एक मरीज का रक्त इस बीमारी से गंभीर रूप से पीड़ित एक रोगी को चढ़ाया है और यह प्रायोगिक इलाज आजमाने वाला देश का ऐसा पहला चिकित्सालय बन गया है। कोरोना से पीड़ित होने के बाद दो सप्ताह से अधिक समय तक अच्छी सेहत में रहे एक व्यक्ति ने ब्लड प्लाज्मा दान दिया है। इस व्यक्ति ने यह ब्लड प्लाज्मा ह्यूस्टन मेथोडिस्ट हॉस्पीटल में ‘कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी’ के लिए दिया है।
इलाज का यह तरीका 1918 के ‘स्पैनिश फ्लू’ महामारी के समय का है। मेथोडिस्ट्स रिसर्च इंस्टीट्यूट के एक चिकित्सक वैज्ञानिक डा. एरिक सलाजार ने एक बयान में कहा, ‘कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी एक महत्वपूर्ण उपचार का तरीका हो सकता है।’ सालज़ार ने कहा, ‘हमारे पास इतना समय नहीं है।’ मेथोडिस्ट ने शुक्रवार को 250 मरीजों से ब्लड प्लाज्मा लेना शुरू किया जिनकी इस वायरस से पीड़ित होने की जानकारी जांच से सामने आयी है। ह्यूस्टन मेथोडिस्ट के अध्यक्ष और सीईओ मार्क बूम ने कहा कि उन्हें कोशिश करने के लिए बाध्य होना पड़ा। उन्होंने कहा, ‘इस बीमारी के प्रकोप के दौरान इसके बारे में जानने के लिए बहुत कुछ है। यदि कोनवालेस्सेंट सीरम थेरेपी से गंभीर रूप से बीमार किसी रोगी के जीवन को बचाने में मदद मिलती है तो हमारे द्वारा हमारे ब्लड बैंक, हमारे विशेषज्ञ संकाय और हमारे शैक्षणिक चिकित्सा के पूर्ण संसाधनों को इस्तेमाल में लेना अविश्वसनीय रूप से सार्थक और महत्वपूर्ण होगा।’

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