शेल्टर होम नहीं साहब, यहां तो जेल से भी बदतर हालात
प्रदीप साहू/निस
चरखी दादरी, 31 मार्च
साहब, यहां तो जेल से भी बदतर हालात हैं। वे यहां काफी मुश्किलों में रात गुजारने पर मजबूर हैं। यहां फर्श पर सोना पड़ रहा है, रात को मच्छर काट रहे हैं। ना कोई मेडिकल सुविधा और न ही सोने के अलावा खाने-पीने की। रात को पीने के पानी के लिए भी तरसना पड़ रहा है।
इससे तो बेहतर वे सड़कों पर भी रात गुजार लेते। यह पीड़ा उन प्रवासी श्रमिकों की है जो शेल्टर होम्स में रह रहे हैं। हमने शेल्टर होम्स का रियल्टी चेक किया तो कुछ श्रमिक फर्श पर सो रहे थे तो कुछ बाहर घूम रहे थे। प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराये खाने में पूरियां भी सूखी थी। वहीं शेल्टर होम्स में तैनात पुलिसकर्मी भी उनको मिल रहे खाने से संतुष्ट नहीं हैं। वे दबी जुबान से कहते हैं, बड़े अधिकारी अपना पेट भर लेते हैं, लेकिन कर्मचारियों की सुध नहीं ली जा रही। ऐसे हालातों में पीने का पानी भी उनको घर से लाना पड़ रहा है। ना मास्क, और ना ही सेनेटाइजर दिए गए हैं। श्रमिकों ने बताया कि रात को शेल्टर होम्स को लॉक कर दिया जाता है। पेशाब करने व पीने का पानी भी नसीब नहीं होता।
कोई परेशानी नहीं होगी : एसडीएम
एसडीएम संदीप अग्रवाल ने बताया कि बेसहारा मजदूरों के लिए प्रशासन की तरफ से उचित व्यवस्था की गई है। मजदूरों के लिए समय पर खाना व चाय पहुंच रही है। जब तक सरकार के आदेश नहीं होंगे श्रमिकों को बाहर नहीं जाने दिया जाएगा। अगर कहीं व्यवस्था नहीं हैं तो वे चेक करवाकर उपलब्ध करवा देंगे। श्रमिकों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
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