पेरेंटिंग

शिखर चंद जैन
कृतिका बहुत उदास थी। आज उसकी 16 वर्षीय बेटी मुस्कान ने उसके साथ फिर से बेअदबी की। कृतिका तो मुस्कान की सहेलियों के साथ हंसी-मजाक कर रही थी। न तो कोई टोका टाकी की और न ही कुछ गलत कहा। लेकिन जैसे ही मुस्कान की सहेलियां गईं, वह उखड़ गई और कृतिका के साथ झगड़ पड़ी। उसे इस बात पर एतराज था कि कृतिका उसकी सहेलियों के बीच में क्यों आती है और इतनी बातें क्यों करती है?
कृतिका को समझ में नहीं आ रहा था कि आखिर उसने ऐसा क्या कर दिया। सभी तो कहते हैं कि बड़ी होती बेटी के साथ सहेलियों की तरह व्य़वहार करना चाहिए। यह उलझन कृतिका की ही नहीं, कई महिलाओं की है। मनोविज्ञानियों, व्यवहार विशेषज्ञों से बातचीत करने पर टिप्स मिले हैं, वे इस दुविधा को काफी हद तक सुलझा सकते हैं-
सबसे पहले मम्मी बनें
आपकी बेटी को सबसे पहले आपकी जरूरत एक मां के रूप में है, जो उसे सही ढंग से ग्रो अप कर सके। उसे सही और गलत की राय दे सके और उसकी तमाम उलझनों को सुलझा सके। भले ही आपकी टोकाटाकी या मार्गदर्शन उसे क्षणिक रूप से बुरी लग जाए और वह पलटकर आपको कड़वे अंदाज में कह दें, ‘ओह मम्मी! आप तो पीछे ही पड़ जाती हो।’ लेकिन भीतर ही भीतर उसे यह बात अच्छी लगती है कि आप उसके प्रति गंभीर हैं और उसके अच्छे-बुरे की परवाह कर रही हैं। यहां आपको कठोर रुख न अपनाकर नरम लेकिन दृढ़ रुख अपनाना चाहिए और बेटी को उसकी सीमाएं बताते रहना चाहिए। यकीन करें, आपकी बेटी आपके साये में खुद को सुरक्षित महसूस करेगी।
दोस्त बनें, पर उसकी जैसी न बनें
कई बार मम्मियां बड़ी होती बेटी की फ्रेंड बनने के चक्कर में मध्यवय में टीनेजर्स जैसे कपड़े पहनना शुरू कर देती हैं और ठीक अपनी बेटी जैसे फैशन अपनाना शुरू कर देती हैं। एक बार सुकन्या अपनी फ्रैण्ड्स के साथ घर आई तो देखा कि उसकी मम्मी ने शौर्ट्स पहन रखे हैं, अजीब सा हेयर स्टाइल कर रखा है और फंकी टी शर्ट डाल रखी है। सुकन्या अपने फ्रेंड्स के सामने बुरी तरह शर्मिन्दा हो गई। फ्रेंड्स ने सुकन्या को खूब टीज किया। फ्रेंड्स के जाने के बाद मीनाक्षी और उसकी बेटी सुकन्या के बीच इसी बात पर झगड़ा हो गया। अक्सर मम्मियां भूल जाती हैं कि उनकी बेटी को फ्रैंड जैसी एक मैच्योर मम्मी चाहिए, उसकी नकल करने वाली टीनेज लुक वाली मिडिल एज्ड फ्रैंड नहीं।
सहेलियों की फ्रेंड बनें
माना कि आप अपनी बेटी के साथ हर मुद्दे पर खुलकर बात करती हैं। उसकी भावनाओं को टटोलने की कोशिश करती हैं। उसके चुटकुलों और व्हाट्सएप मैसेजेस पर खुलकर हंसती हैं। उसके फैशन ट्रेंड को समझने की कोशिश करती हैं और उनमें दिलचस्पी लेती हैं, लेकिन जब बेटी की सहेलियां साथ हों तो उसे अकेला छोड़ दें। ध्यान रखें आपको फ्रेंड अपनी बेटी का बनना है, उसकी सहेलियों का नहीं। जब आप उसकी सहेलियों के बीच जाती हैं, हंसी ठिठोली करती हैं और उनमें से एक दिखने की कोशिश करती हैं, तो उस वक्त सहेलियां भले ही कुछ नहीं कहतीं, लेकिन बाद में वो आपके बारे में जमकर गॉसिपिंग करती हैं, जो आपकी बेटी को कतई अच्छा नहीं लगेगा। आपकी टीनेज बेटी के मन में सवाल उठता है, ‘आखिर मम्मी को मेरी उम्र का क्यों बनना और दिखना है? आखिर वे मेरी फ्रेंड्स को इतना इम्प्रेस करने की कोशिश क्यों कर रही हैं।” वैसे भी बच्चों के पास बहुत सारी ऐसी बातें होती हैं, जो वे अपनी फ्रैण्ड्स के सामने ही करना चाहते हैं, किसी बड़े के सामने नहीं। इसलिए उन्हें उनका स्पेस दें।

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