काश! पंख होते जो मेरे
बाल कविता
काश! पंख होते जो मेरे
आसमान में उड़ता जाता।
सुना वहां पर परी लोक है
जाकर परियों से मिल आता।।
आसमान में उड़ती चिड़ियों
से जाकर मैं हाथ मिलाता।
आसमान में वायुयान से
जाकर लम्बी रेस लगाता।।
रूई सरीखे बादल छूकर
उनसे निर्मल जल बरसाता।
अपने सभी दोस्तों को भी
आसमान की सैर कराता।।
चन्दामामा की बगिया से
तारे कई तोड़कर लाता।
उन्हें कमरे की दीवारों पर
फेवीकोल लगा चिपकाता।।
अगर पंख होते जो मेरे
तो उड़ता बस उड़ता जाता।
सच में फिर तो भाई मेरे
मज़ा खूब ही जमकर आता।
-गौरव वाजपेयी
The post काश! पंख होते जो मेरे appeared first on दैनिक ट्रिब्यून.
from दैनिक ट्रिब्यून https://ift.tt/2S8S2XM
via Latest News in Hindi
0 Comments