केवल तिवारी

चिट्ठियों के जरिये संदेश पहुंचाने की इच्छा शायद हर व्यक्ति के मन में होती है। या कह सकते हैं कि ऐसा भाव होता है कि कोई भी व्यक्ति अपनी पूरी बात सामने वाले से कह सके। वह वार्तालाप ऐसा हो, जिसमें प्रतिवाद न हो। बात पूरी हो जाये। मां-बाप अपनी संतान से कुछ कहना चाहें या कोई लड़का-लड़की अपने माता-पिता से या फिर रिश्ता कोई भी, चिट्ठियां ही आज भी सशक्त माध्यम हैं संप्रेषण की।
इसी चिट्ठी विधा को सहेजने का अनूठा प्रयोग किया है डॉक्टर विमला भंडारी ने। उन्होंने एक पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित करवाई। उनमें से बेहतरीन 37 पत्रों को किताब के रूप में सामने ले आईं। सचमुच पत्र इतने बेहतरीन लिखे गए हैं कि पढ़ने वाला भी भावुक हुए बिना नहीं रह सकता है। उन लोगों के लिए तो यह किताब खजाना सरीखा है जिन लोगों ने उस दौर को जिया है जब चिट्ठी ही संचार का एक सहज माध्यम था।
कहीं एक मां अपनी बेटी को उसके 16वें बरस पर चिट्ठी लिख रही है कि बेटा थोड़ी सी शरारत कर लेना। कीचड़ में उछल लेना और हां, 18 बरस की हो जाओ फिर तुम्हारे सपनों के राजकुमार की भी तो बातें करनी होंगी। ऐसी ही कहीं एक पिता अपने बेटे को ताकीद करता है कि संघर्ष को समझो। कहीं एक बेटी अपनी सफलता की कहानी अपने घरवालों को लिख भेजती है और हां एक जगह एक बच्ची दादी से कहती है, इस बार तो आपके साथ बहुत सारा समय बिताना है। कहीं मां-बाप बच्चों की छुट्टियों का इंतजार करने की बात लिख रहे हैं तो कहीं दोस्तों की बातें चल रही हैं।
पुस्तक : पत्र तुम्हारे लिए संपादक : डॉ. विमला भंडारी प्रकाशक : ग्रंथ विकास, जयपुर पृष्ठ : 131 मूल्य : रु. 250.

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