अरुण नैथानी

इधर समाज में स्वीकार्य और जनमानस को उद्वेलित करने वाले महानायकों-नायकों पर बनने वाली बॉयोपिक फिल्में दर्शकों को लुभा रही हैं। यह निर्माता-निर्देशकों की सुविधा भी है और मुनाफा भी। पहले ही जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पहचान बना चुके नायकों पर बनी फिल्मों की कामयाबी की गारंटी यह भी होती है कि लोग इनसे आसानी से जुड़ जाते हैं। उनके बारे में बहुत कुछ जानते हैं और अधिक जानना चाहते हैं। निर्माता-निर्देशक भी इस बात का लाभ उठाते हैं। उन्हें समाज में स्थापित नायक पर फिल्म बनाने में ज्यादा जोखिम भी नजर नहीं आता। इस साल करीब एक दर्जन बॉयोपिक फिल्में दर्शकों तक पहुंचेंगी।
कम समय में पत्रकारिता, लेखन और जनसंपर्क में पहचान बनाने वाले फिल्म समालोचक फजले गुफरान की फिल्मों से जुड़े विषयों पर खासी दखल रही है। दैनिक हिंदुस्तान में उनकी एक दशक की पत्रकारिता में फिल्म पत्रकारिता ने उनके फिल्मों से जुड़ाव को गहरा किया। बॉलीवुड के खलनायकों पर लिखी उनकी पुस्तक ‘मैं हूं खलनायक’ को पाठकों का अच्छा प्रतिसाद मिला, फिल्म जगत में चर्चा भी हुई।
समीक्ष्य पुस्तक–‘बॉलीवुड बायोपिक्स: आधी हकीकत-बाकी फसाना’ में फजले गुफरान ने एक सदी के दौरान आई बॉयोपिक्स फिल्मों की पड़ताल की है। आठ खंडों में बंटी पुस्तक में ‘बॉयोपिक्स का सफरनामा’ शीर्षक खंड में लेखक ने बायोपिक्स फिल्मों की शुरुआत, शैलियों, आजादी से पहले और बाद में बनी चर्चित फिल्मों, बाजार, मुनाफा, निवेश से जुड़े विभिन्न पहलुओं की चर्चा की है। बाकी खंडों में असली खिलाड़ी, अपराध की दुनिया की कहानियों, ऐतिहासिक किरदार, राजनीतिक किरदार, मौजूदा दौर में समाज के असली नायक, साहित्य-कला से जुड़े किरदारों, परदे पर उतारी गई फिल्मी कहानियों पर केंद्रित बॉयोपिक फिल्मों की पड़ताल की है। फिल्मों के निर्माण की प्रक्रिया, निर्माता-निर्देशकों के प्रयास और कलाकारों की भूमिका का जिक्र है।
लेखक ने बॉयोपिक फिल्मों का व्यापक अध्ययन करके इस स्थापित फिल्म निर्माण शैली का विस्तृत विवरण दिया है। दर्शकों की रुचि-बाजार की पड़ताल की है। उस दौर का भी जिक्र किया है जब बॉयोपिक शैली में देवी-देवताओं, संतों, युद्ध नायकों और स्वतंत्रता सेनानियों और साहित्यकारों पर बॉयोपिक फिल्में बनीं। चोटी के कलाकारों से सजी ये संगीतमय फिल्में अच्छा-खासा कारोबार भी करती थीं। लेखक ने निर्माता-निर्देशकों की चर्चित हस्तियों की रियल लाइफ को रील लाइफ में बदलने की ललक को भी उजागर किया है। पुस्तक एक खास रुचि के दर्शकों के ज्ञानवर्धन में सहायक होगी।
पुस्तक: बॉलीवुड बॉयोपिक्स लेखक : फजले गुफरान प्रकाशक : यश पब्लिकेशंस, दिल्ली पृष्ठ : 230 मूल्य : रु. 225.

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