ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
नयी दिल्ली, 1 जनवरी
लगातार 5 राज्य खोने के बाद भाजपा अब दिल्ली को फतह करने की रणनीति बनाने में जुट गई है। भाजपा हाईकमान दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए चेहरा तय करने को लेकर मंथन में जुटा है। पार्टी इस दुविधा में है कि मुख्यमंत्री पद के चेहरे के साथ चुनावी मैदान में उतरा जाये या बिना चेहरे के।
दिल्ली में पिछले 20 साल से भाजपा सत्ता से बाहर है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ के बाद महाराष्ट्र और अब झारखंड भाजपा के हाथ से निकल गए हैं। दिल्ली के बाद भाजपा को पश्चिम बंगाल, बिहार और तमिलनाडु के चुनाव मैदान में जाना है। फिलहाल पार्टी का पूरा जोर दिल्ली पर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की जोड़ी दिल्ली विधानसभा की चुनाव तैयारी पर नजर रखे हुए है।
गौर हो कि 2015 के चुनाव मे किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर भाजपा को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। पार्टी 70 सीटों वाली विधानसभा में मात्र 3 सीटों पर सिमट गई थी। इससे पहले भाजपा ने 2014 में डाॅ. हर्षवर्धन के चेहरे के साथ चुनाव लड़ा था, लेकिन कुछ सीटों से बहुमत पाने से चूक गई।
दिल्ली में भाजपा का मुख्य मुकाबला मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ है। इसलिए उसे केजरीवाल को टक्कर देने के लिए उसी स्तर के चेहरे की तलाश है। कभी पंजाबी और वैश्य समुदाय की पार्टी मानी जाने वाली भाजपा का एक वर्ग पूर्वांचल के चेहरे पर दांव लगाने के पक्ष में है, जबकि दूसरा पक्ष दिल्ली देहात के नेता को आगे रखने की कोशिश में है।
मोदी सरकार की उपलब्धियों पर लड़ेंगे : जावड़ेकर
भाजपा के दिल्ली प्रभारी केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बुधवार को कहा कि प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। जब भी फैसला होगा, घोषणा कर दी जाएगी। जावड़ेकर ने कहा कि दिल्ली में भाजपा मोदी सरकार की उपलब्धियों को लेकर चुनाव मैदान में जाएगी।

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