उन्नाव गैंगरेप पीड़िता का शव लौटा गांव, आज दफनाया जाएगा, भारी पुलिस फोर्स तैनात
डिजिटल डेस्क, उन्नाव। जलाए जाने के 65 घंटे बाद जब गैंगरेप पीड़िता का शव उसके घर पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन था। उसने करीब 43 घंटे तक जीवन से संघर्ष किया, लेकिन शुक्रवार रात 11.40 बजे हार गई। मौत से पहले उन्नाव की इस बेटी ने कहा था कि 'मुझे बचाओ, मैं मरना नहीं चाहती, मैं उन्हें फांसी पर लटकते देखना चाहती हूं।' गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश के उन्नाव की उस 23 वर्षीय बेटी को गुरुवार यानी 5 दिसंबर की सुबह मिट्टी का तेल डालकर जला दिया था।
Unnao: Mortal remains of Unnao rape victim have been brought to her village, from Safdarjung hospital in Delhi. She had passed away last night during treatment. pic.twitter.com/p4OsU61Poh
— ANI UP (@ANINewsUP) December 7, 2019
गुरुवार सुबह 4 बजे उन्नाव गैंगरेप पीड़िता दुष्कर्म के मामले में होने वाली सुनवाई के लिए रायबरेली की एक अदालत जाने के लिए निकली थी। उसे उन्नाव के बैसवारा बिहार रेलवे स्टेशन से ट्रेन पकड़ना था। इसी दौरान उस पर दरिंदों हमला किया और प्रेट्रोल डालकर आग के हवाले कर दिया और मरने के लिए छोड़ दिया।
इस सबके बावजूद वह खड़ी हुई और एक किलोमीटर तक चलकर एक व्यक्ति के पास पहुंची, जो एक घर के बाहर काम कर रहा था। पीड़िता ने उससे मदद मांगी और उसने खुद पुलिस को फोन किया। इसके बाद उसे नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां से उसे लखनऊ के सिविल अस्पताल में रेफर कर दिया गया। वहां प्लास्टिक सर्जरी बर्न यूनिट में भर्ती कर पीड़िता का बयान दर्ज किया गया। अपने बयान में उसने सभी पांचों आरोपियों के नाम लिए।
दुष्कर्म के आरोपियों सहित 5 लोगों द्वारा कथित रूप से जलाए जाने के बाद पीड़िता को एयर एंबुलेंस के जरिए लखनऊ से दिल्ली लाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह 90 फीसदी जल चुकी थी। वो हृदयाघात से बच नहीं सकी और उसे शुक्रवार रात 11:40 बजे मृत घोषित कर दिया गया। इस तरह करीब 44 घंटे जीवन से लड़ने के बाद वो हार गई। अस्पताल के एक वरिष्ठ डॉक्टर ने कहा, 'वह दर्द में थी. वह खुद को बचाने की गुहार लगा रही थी।'
जलाए जाने के करीब 65 घंटे बाद शनिवार रात 9 बजे पीड़िता का शव एम्बुलेंस के जरिए उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले स्थित उसके गांव पहुंचा। उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता के भाई ने शनिवार को कहा कि उसकी बहन को तभी न्याय मिलेगा, जब सभी आरोपियों को वहीं भेजा जाएगा, जहां वह चली गई। साथ ही उन्होंने कहा कि बहन के शव में जलाने लायक कुछ नहीं बचा, इसलिए दफनाएंगे।
उन्होंने कहा कि उसने मुझसे कहा था, भाई मुझे बचा लो, लेकिन मैं दुखी हूं कि उसे बचा नहीं सका। आरोपियों को या तो मुठभेड़ में मार गिराया जाना चाहिए या फांसी देनी चाहिए। उन्हें जिंदा रहने का अधिकार नहीं है।
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