नवीन पांचाल/हप्र
गुरुग्राम, 7 नवंबर
वाहन निर्माता कंपनी होंडा के मानेसर प्लांट में दो पहिया वाहनों का उत्पादन न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। प्लांट में 4 दिन से उत्पादन ठप है। जो नियमित श्रमिक काम कर रहे हैं, वे पर्याप्त उत्पादन नहीं करवा पा रहे हैं। विपरीत हालात के बीच श्रम विभाग श्रमिकों व प्रबंधन के बीच समझौता होने को लेकर आशावादी है।
होंडा मानेसर प्लांट में स्कूटी और बाइक के करीब 14 माॅडलों का उत्पादन होता है। नियमित उत्पादन में अस्थाई कर्मचारियों की बड़ी भूमिका है। ऐसे अनेक कार्य हैं जो अस्थाई कर्मचारी ही करते हैं।
इन कार्यों का अनुभव स्थाई कर्मचारियों को उतना नहीं होता, इसलिए इन्हें उत्पादन लेन की मुख्य कड़ी कहा जाता है, लेकिन रविवार के बाद से करीब 2 हजार अस्थाई कर्मचारी हड़ताल पर हैं। ये प्लांट के अंदर और बाहर काम छोड़कर बैठे हैं। ऐसे में उत्पादन लेन का कार्य प्रभावित हो रहा है। पहले तीन दिन तो उत्पादन पूरी तरह से बंद रहा, लेकिन एक दिन पहले प्रबंधन ने स्थाई कर्मचारियों को उत्पादन लेन पर शिफ्ट कर दिया। इसके बाद लेन तो चली, लेकिन उत्पादन अभी तक शुरू नहीं हो पाया है। सूत्र बताते हैं कि उत्पादन शुरू तभी हो पाएगा जब या तो अस्थाई श्रमिक काम पर लौट आएंगे या स्थाई श्रमिक पूरी कुशलता के साथ अस्थाई श्रमिकों के लेन प्रोडक्शन कार्य को संभाल लेंगे।

दाेनों पक्ष अड़े
उधर, प्लांट में अस्थाई श्रमिकों की हड़ताल छठे दिन में प्रवेश कर गई है। लेकिन न तो प्रबंधन श्रमिकों की मांगों के सामने झुकने के लिए तैयार हो रहा है और न ही श्रमिक प्रबंधन की शर्तें मानने की हामी भर रहे हैं। ऐसे में 4 दिन से प्लांट के अंदर डेरा जमाए बैठे श्रम विभाग के अधिकारियों का फोकस सबसे पहले श्रमिकों का आक्रोश रोकने पर है। प्लांट में स्थाई कर्मचारियों की यूनियन के प्रधान सुरेश गौड़ कहते हैं, ‘अभी तक की बैठकों में बातचीत किसी ऐसी स्टेज पर पहुंची ही नहीं जहां इसके सिरे चढ़ने की उम्मीद की जा सके।’ उनके अनुसार सभी का रोजगार बचाना प्राथमिकता है, दूसरे विकल्पों का स्थान बाद में आता है।

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