जीवन का शाश्वत सत्य
नगर सेठ ने संत बायजीद की सभा में प्रवचन के पश्चात आग्रह किया—‘आप मुझे एक कागज पर ऐसा कुछ लिखकर दें, जिससे आने वाली पीढ़ी को भी उस ज्ञान से लाभ अर्जित होता रहे।’ बायजीद ने एक कागज पर लिखा— ‘इस संसार में हर वस्तु समाप्त होने वाली है। पहले पिता मरता है, फिर पुत्र मरता है तत्पश्चात पौत्र को भी मरना ही है।’ यह पढ़कर वहां उपस्थित सभी जन आश्चर्यचकित हुए। सेठ रोष से बोला—‘मैंने ऐसा कुछ लिखने को कहा था, जिससे मेरा परिवार खुश और संतुष्ट रहे। आप तो हमारी भावनाओं के साथ उपहास करने लगे।’ बायजीद ने समझाया—‘वत्स, हमारी कोई भी बात सत्य रहित नहीं होती है। अगर तुम्हारा पुत्र तुमसे पहले मृत्यु को प्राप्त हो जाए तो क्या तुम पूरी ज़िंदगी सुख से रह सकोगे। अगर तुम्हारा पौत्र तुम्हारे पुत्र से पहले दुनिया त्याग दे तो क्या तुम्हारे पुत्र की दुनिया बदरंग नहीं हो जाएगी। इसके विपरीत यदि जैसा मैंने लिखा है तुम्हारा परिवार प्राकृतिक रूप से इस जग से विदा ले तब क्या ज्यादा उचित नहीं होगा। दुनिया में यही रीत चली आ रही है। अतः मनुष्य का अपनी आयु पूर्ण करके संसार छोड़ना ही प्राकृतिक है और यही शाश्वत सत्य है।’
प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन

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