मिस्त्री तय करेंगे हरियाणा के कांग्रेस दिग्गजों का भविष्य
दिनेश भारद्वाज/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 26 सितंबर
हरियाणा में कांग्रेस दिग्गजों का भविष्य में पार्टी के वरिष्ठ नेता मधुसूदन मिस्त्री तय करेंगे। मिस्त्री की अध्यक्षता वाली स्क्रीनिंग कमेटी विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के पैनल तैयार करेगी। प्रदेश इलेक्शन कमेटी की पहली बैठक में सभी मौजूदा विधायकों को ‘सिटिंग-गैटिंग’ के फार्मूले के तहत टिकट देने पर सहमति बनी है। लोकसभा चुनाव में भितरघात करने वाले नेताओं पर गाज गिर सकती है। बृहस्पतिवार को नयी दिल्ली स्थित पंजाब भवन में हुई प्रदेश इलेक्शन कमेटी की बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा हुई।
अहम बात यह है कि पहली ही बैठक के बाद इलेक्शन कमेटी की भूमिका भी खत्म हो गई। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष कुमारी सैलजा के नेतृत्व वाली इस कमेटी ने 90 हलकों में से एक भी सीट पर चर्चा नहीं की। आमतौर पर इलेक्शन कमेटी संभावित चेहरों के पैनल बनाकर स्क्रीनिंग कमेटी के पास भेजती रही है लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। पार्टी ने चुनाव लड़ने के इच्छुक नेताओं से आवेदन मांगे थे, इसके बाद 1300 के करीब लोगों के आवेदन पहुंचे हैं। इनकी छंटनी का काम चल रहा है। छंटनी के बाद हलकावार आए नामों की सूची स्क्रीनिंग कमेटी के पास जाएगी। स्क्रीनिंग कमेटी सभी हलकों के लिए दो से तीन लोगों के नामों का पैनल तैयार करके सोनिया गांधी के नेतृत्व वाली सेंट्रल इलेक्शन कमेटी को भेजेगी। मधुसूदन मिस्त्री ने 28 सितंबर को नयी दिल्ली में स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक बुलाई है। बैठक में प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद, दीपा दास मुंशी, देवेंद्र यादव, कुमारी सैलजा व भूपेंद्र सिंह हुड्डा मौजूद रहेंगे। बृहस्पतिवार को सैलजा की अध्यक्षता में हुई बैठक में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा रणदीप सिंह सुरजेवाला, कैप्टन अजय सिंह यादव, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्नोई, कुलदीप शर्मा, डॉ़ रघुबीर सिंह कादियान, कर्ण सिंह दलाल, आशीष दुआ, आफताब अहमद, परमवीर सिंह, शमेशर सिंह गोगी, वीरेंद्र राठौर, अनिल धन्तौड़ी, रंजीता मेहता, हरमोहिंद्र सिंह चट्ठा, फूलचंद मुलाना, महेंद्र प्रताप सिंह, आनंद सिंह दांगी, शादीलाल बतरा, बजरंग दास गर्ग, जयवीर सिंह वाल्मीकि, बिमला सरोहा, जयपाल सिंह लाली, पंडित रामजीलाल, एनएसयूआई अध्यक्ष दिव्यांशु बुद्धिराजा व यूथ कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष सचिन कुंडू मुख्य रूप से मौजूद रहे।
इसी तरह से डॉ़ अजय चौधरी, सुभाष बतरा, श्रीकृष्ण हुड्डा, राव नरेंद्र सिंह, राव धर्मपाल सिंह, जनरैल सिंह भी बैठक में पहुंचे। कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ़ अशोक तंवर ने इस बैठक से दूरी बनाकर रखी। पूर्व सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा व पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल भी कमेटी में बतौर सदस्य शामिल हैं लेकिन वे दोनों भी बैठक में नहीं पहुंचे। बैठक में अधिकांश सदस्यों ने मौजूदा सभी विधायकों को चुनाव लड़वाने को कहा ताकि वे अपने हलकों में प्रचार शुरू कर सकें।
बैठक में आदमपुर से विधायक कुलदीप बिश्नोई व पूर्व वित्त मंत्री कैप्टन अजय सिंह यादव ने हालिया लोकसभा चुनाव में हुई भितरघात का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक सुर में कहा कि जिन लोगों ने पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ काम किया, उन्हें विधानसभा चुनाव का टिकट नहीं मिलना चाहिए। यही नहीं, ऐसे लोगों से जवाब भी मांगने की मांग इन दोनों नेताओं ने की।
कमेटी सदस्य कर सकेंगे सिफारिश
बैठक में कुमारी सैलजा ने इलेक्शन कमेटी के सदस्यों से कहा कि अगर वे किसी भी हलके के लिए मजबूत उम्मीदवार के नाम की सिफारिश करना चाहते हैं तो उसका नाम लिखित में दें। इसी तरह से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले सभी 10 उम्मीदवारों के लिए यह विकल्प रखा गया है। वे अपने क्षेत्र के हलकों के लिए नाम दे सकेंगे। हालांकि यह तय नहीं है कि उनके द्वारा की जाने वाली सिफारिश को मान ही लिया जाएगा। इसका फैसला स्क्रीनिंग कमेटी और फिर सेंट्रल इलेक्शन कमेटी करेगी।
रहेगा जातिगत समीकरणों पर जोर
बैठक में कई सदस्यों ने सुझाव दिए कि विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारों का चयन जातिगत समीकरणों के हिसाब से होना चाहिए। उनका तर्क था कि ब्राह्मण, वैश्य, राजपूत, पंजाबी के अलावा समाज के सभी वर्गों व जातियों के प्रतिनिधियों को टिकटों में प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इसी तरह से पिछड़ा वर्ग-ए और बी कैटेगरी को भी टिकटों में तवज्जो देनी की मांग कई सदस्यों ने बैठक में उठाई। बैठक में युवाओं और नये चेहरों को इस बार मौका दिये जाने की मांग भी बैठक में उठी।
ग्राउंड पर संगठन नहीं, बनें पर्यवेक्षक
बैठक में जिला व ब्लाॅक स्तर पर पार्टी का संगठन नहीं होने का मुद्दा भी बैठक में उठा। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष तंवर पांच वर्षों से भी अधिक समय तक प्रदेशाध्यक्ष रहे लेकिन वे जिला व ब्लाॅक कार्यकारिणी तक का गठन नहीं करवा सके। लगातार यह तीसरा चुनाव होगा, जिसमें पार्टी बिना सेनापतियों के मैदान में उतरेगी। 2014 में विधानसभा चुनाव के बाद हालिया लोकसभा चुनाव भी बिना जिला व ब्लाॅक प्रधानों के लड़े गये। इसके लिए सुझाव दिया गया कि अगले दो-चार दिनों में ही जिला व ब्लाॅक स्तर पर कार्यकारी अध्यक्ष या पर्यवेक्षक नियुक्त किए जाएं।
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