उत्तराखंड अब पांचवें धाम में उमड़ेंगे श्रद्धालु
राजेन्द्र जोशी
उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र में स्थित गुरुद्वारा हेमकुंट साहिब प्रदेश के पांचवें धाम के रूप में विश्वविख्यात है। दुनियाभर में सिखों के सबसे पवित्र स्थानों में शामिल यह गुरुद्वारा श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को समर्पित है। यह 7 पर्वत चोटियों से घिरा हुआ और हिमनदों से बनी झील के साथ 4329 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इस बार हिमालय में बर्फबारी अधिक होने के कारण यात्रा ज्यादा मुश्किल हो सकती है। पवित्र तीर्थ पहुंचने वाले यात्रियों को घांघरिया से आगे 300 मीटर के बर्फ के दर्रे से होकर गुजरना होगा। इस बार बुजुर्ग और बीमार श्रद्धालुओं को सलाह दी गयी है कि वे 15 जून के बाद यात्रा पर आएं, क्योंकि धाम में सर्दी बहुत है।
हेमकुंट साहिब की दुर्गम यात्रा की शुरुआत गोबिंदघाट से होती है। जबकि, गोबिंदघाट तक का सफर अपने वाहन या टैक्सी से तय कर सकते हैं। देहरादून के जॉलीग्रांट हवाई अड्डे से गोबिंदघाट करीब 292 किलोमीटर की दूरी पर है। हेमकुंट साहिब से सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। ऋषिकेश से गोबिंदघाट का सफर करीब 273 किलोमीटर का है। ऋषिकेश से टैक्सी व बस से देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, पीपलकोटी और जोशीमठ होते हुए गोबिंदघाट तक पहुंचा जा सकता है। गोबिंदघाट से करीब 19 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद ही हेमकुंट साहिब पहुंचा जाता है। गोबिंदघाट से करीब 13 किलोमीटर की दूरी पर घांघरिया में रुकने व ठहरने के लिए होटल है। यहां से आगे 6 किलोमीटर की चढ़ाई और भी दुर्गम है। कई जगहों पर बर्फ काटकर रास्ता बनाया गया है। घांघरिया से ही एक रास्ता विश्वप्रसिद्ध फूलों की घाटी को जाता है। चढ़ाई वाले कठिन मार्ग को देखते हुए प्रदेश सरकार ने इस मार्ग के समानांतर हेलीकॉप्टर सेवा भी शुरू की है, जो गोबिंदघाट अथवा पांडूकेश्वर से घांघरिया तक जाती है। इसका किराया लगभग 5 हजार रुपये प्रति यात्री है।
तप स्थान : हेमकुंट साहिब को श्री गुरु गोबिंद साहिब जी का पूर्व जन्म का तपस्थल माना जाता है। दरअसल, श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने तपस्थल का संकेत अपनी एक कृति में दिया है। हालांकि, करीब 2 सदियों तक यह स्थान गुमनाम रहा। गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपने तप स्थान की भोगौलिक स्थिति के बारे में जो संकेत दिये, उन पर विचार करते हुए कई सिख विद्वानों (भाई संतोख सिंह, पंडित तारा सिंह नरोत्तम, संत सोहन सिंह, हवलदार बाबा मोदन सिंह और भाई वीर सिंह) ने इस स्थान की खोज में अहम योगदान दिया। आखिरकार 1936 में यहां गुरुद्वारे का निर्माण किया गया और इसके अगले साल गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश किया गया। अब 7 सदस्यीय कमेटी इस यात्रा के संचालन की निगरानी करती है। यह समिति गुरुद्वारा श्री हेमकुंट साहिब सहित हरिद्वार, ऋषिकेश, श्रीनगर, जोशीमठ, गोबिंदघाट और गोबिंद धाम के गुरुद्वारों में यात्रियों के लिए प्रबंध करती है।
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