मनमर्जी से फीस वसूली रोकने के मसौदे पर मोहर के आसार
बलविंदर जम्मू/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 4 जून
पंजाब मंत्रिमंडल की 6 जून को हो रही प्रस्तावित बैठक में प्राइवेट मेडिकल कालेजों व यूनिवर्सिटियों की ओर से एमबीबीएस के विद्यार्थियों से भारी फीस वसूली रोकने के लिए कानून में संशोधन के लिए एक ड्राफ्ट बिल लाया जा रहा है। इस बिल पर सहमति बनने के बाद ही प्रदेश के विद्यार्थियों को कोई राहत मिल सकती है। प्राइवेट मेडिकल कालेजों व यूनिवर्सिटियों में डाक्टरी की पढ़ाई कर रहे छात्रों को पिछले सत्र से भारी फीस चुकानी पड़ रही है।
प्राप्त जानकारी अनुसार लगभग 9 महीने पहले शिक्षा एवं शोध विभाग ने बिल का प्रारूप तैयार किया था। इसके द्वारा पंजाब प्राइवेट हेल्थ साइंसिज एजुकेशन इंस्टीच्यूट एक्ट 2006 में संशोधन किया जाना है।
इस संशोधन के बाद राज्य सरकार को प्राइवेट मेडिकल संस्थाओं की फीसों को नियमित करने का हक मिल जाएगा। बिल के ड्राफ्ट को एडवोकेट जनरल के कार्यालय की तरफ से मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन इस ड्राफ्ट बिल को पिछले 9 महीनों से मंत्रिमंडल की बैठक में पेश नहीं किया गया, जिसके चलते एक्ट में संशोधन नहीं हो सका। एमबीबीएस के नये सत्र के दाखिले शुरू हो चुके हैं, और इसमें दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों को भारी फीस चुकानी पड़ेगी, क्योंकि मंत्रिमंडल ने अभी इस पर अपना अंतिम फैसला लेना है।
तो 15 लाख रह जाएगी फीस
यदि यह संशोधन लागू हो जाता है तो प्राइवेट कालेजों और यूनिवर्सिटियों को प्रति विद्यार्थी फीस घट कर 15 लाख के करीब रह जाएगी। फिलहाल यह फीस 50 से 70 लाख रुपये के बीच है।
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