आजकल सभी माता -पिता अपने बच्चों की सेहत के लिए बहुत ही चिंतित रहते है। पेरेंटस खुद से ज्यादा बच्चों के लिए सोचते है और उनका ध्यान रखते है। चाहे वो उनके खाने-पीने को लेकर हो या उनकी पढ़ाईको लेकर हो। लेकिन उसके बाद भी बहुत सारी ऐसी बाते होती रहती है जिन्हें पेरेंटसvilkul  नजरअंदाज कर देते है। बच्चों की सेहत को ध्यान में रखते हुए पेरेंटस बच्चों को फल और उनका ज्यूस पिलाते है। लेकिन कई बार बच्चों को डिब्बा बंद ज्यूस पिलाते है जो सेहत के लिए हानिकारक होता है । तो चलिए आपको बताते है इसके बारे में ..

आहार विशेषज्ञों की माने तो बाजार में बिकने वाले डिब्बाबंद जूस में अतिरिक्त मिठास होती है, जो बच्चों में शक्कर की मात्रा बढ़ाती है। इस उम्र में यह उनके लिए सही नहीं है।स्कॉटलैंड में हुए शोध के परिणामों के आधार पर वहां की सरकारी एजेंसियों ने स्कूलों में बच्चों को दोपहर के भोजन के साथ सिर्फ पानी और दूध देने की बात कही है। उनका कहना है कि जूस में मौजूद अतिरिक्त शक्कर बच्चों के दांतों समेत सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए सही नहीं है।

ब्रिटिश फ्रूट जूस एसोसिएशन के प्रवक्ता का कहना है कि सरकारी शोध के अनुसार बच्चों द्वारा दिन में लिए जाने वाले पांच आहार में फलों और सब्जियों की भरपूर मात्रा होनी चाहिए।इनके जरिये उनके शरीर में जरूरी पोषक तत्व पहुंचते हैं और फलों में प्राकृतिक रूप से मिठास होती है। ऐसे में उन्हें अतिरिक्त शक्कर वाली चीजें देना उनके स्वस्थ विकास को बाधित कर सकता है। जिसका परिणाम यह होता है कि उनमें कम उम्र से मोटापा समेत अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

भारत में कई आहार विशेषज्ञों का कहना है कि डिबाबंद जूस पीने से बेहतर है कि सीधे फलों का सेवन किया जाए। इससे लोगों को फलों में मौजूद पोषक तत्व तो मिलेंगे ही, फाइबर भी मिलेगा।

मोटापा बढ़ने का खतरा – डिब्बाबंद जूस से मोटापा बढ़ने का खतरा हो सकता है। आहार विशेषज्ञ भी मानते हैं कि प्राकृतिक फल और सब्जियों की तुलना में पैक्ड जूस को लेने से ज्यादा वजन बढ़ता है।

पेट से जुड़ी परेशानी – नाशपाती, स्वीट चेरी और सेब जैसे कुछ फलों में सॉर्बिटॉल जैसी शुगर मौजूद होती है, जो आसानी से पचती नहीं। इससे गैस, दस्त, पेट में उथल-पुथल और डायरिया होने की आशंका रहती है।

पोषक तत्वों का खत्म होना-  डिब्बाबंद जूस बानने के लिए फलों के रस को पहले उबाला जाता है ताकि उनमें बैक्टीरिया खत्म किए जा सकें। लेकिन इससे विटामिन समेत अन्य पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। इससे शरीर को इससे फाइबर भी नहीं मिलता।



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