नई दिल्ली : दिल्ली के अधिकतर निजी स्कूलों के पास शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के तहत वेतन देने के बाद भी सरप्लस फंड है। ऐसे में उन्हें फीस बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। यह कहना है उपमुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया का। कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए उन्होंने कहा कि हम निजी स्कूलों से जुड़े सभी पहलुओं को कोर्ट के समक्ष रखेंगे। उन्होंने कहा कि कोर्ट के फैसले के बाद भी देखने को आया है कि निजी स्कूल कोर्ट के निर्देश का पालन नहीं कर रहे।

जबकि कोर्ट के फैसले के तहत सस्ते दरों पर बने जमीन स्कूल सरकार की मंजूरी के बिना फीस नहीं बढ़ा सकते। उन्होंने कहा कि दिल्ली में 325 स्कूल ने डीडीए की रियाती जमीन पर बने हुए हैं। इनमें से 265 स्कूलों ने फीस बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। जबकि 60 स्कूलों ने प्रस्ताव ही नहीं भेजा। जब इन आए प्रस्तावों की जांच की गई तो 32 स्कूलों ने नाम वापस ले लिया।

मनीष सिसोदिया ने कहा कि अब 233 स्कूलों के खातों की जांच की गई। इसमें पाया गया कि 150 स्कूलों के पास शिक्षकों को सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन देने के बाद भी सरप्लस फंड है। ऐसे में हमने उन सभी 150 स्कूलों को फीस बढ़ाने से साफ मना कर दिया। सिसोदिया ने कहा कि जांच के दौरान पाया गया कि वंसत कुंज में 40 करोड़ रुपये का सरप्लस है।

इसके अलावा कुछ अन्य स्कूल भी है जिसके पास सरप्लस फंड रहा। इसके अलावा स्कूूूलों ने फर्जी बिल भी लगाए थे। उन्होंने कहा कि हम निजी स्कूलों की मनमानी को नहीं सकेंगे। जांच के दौरान जो भी तथ्य सामने आए हैं उसे कोर्ट के सामने रखा जाएगा।



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