रेवाड़ी : लकड़ी, फाइबर शीट से कमरों का पार्टिशन
तरुण जैन
रिहायशी आबादी व औद्योगिक विकास के चलते रेवाड़ी जिला नयी पहचान बना चुका है। यहां रोजगार के अवसर बढ़े हैं। ऐसे मंे देशभर के लोग यहां के उद्योगों में काम करते हैं। उन्हें रहने के लिए मकानों की जरूरत होती है। इस कमी को पूरा करने के लिए शहर में पीजी (पेइंग गेस्ट) कल्चर तेजी के साथ विकसित हुआ है। रेवाड़ी शहर के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्र बावल व धारूहेड़ा में लगातार पीजी की संख्या बढ़ती जा रही है। रेवाड़ी शहर की आबादी 2 लाख है। यहां पीजी धीरे-धीरे एक बिजनेस का रूप ले रहा है। शहर में व आसपास लगभग 100 से अधिक पीजी चल रहे हैं। इनमें गर्ल्स और ब्वाय दोनों तरह के पीजी शामिल हैं। पीजी संचालन के लिए प्रशासन की एक नीति है, जिसका पालन करना जरूरी है।
ट्रिब्यून संवाददाता ने जब शहर के पीजी का दौरा किया तो सामने आया कि अधिकांश पीजी ने न तो रजिस्ट्रेशन कराया है और न ही फायर विभाग से एनओसी लिया है। हूडा के सेक्टर व पॉश एरिया मॉडल टाउन, साउथ सिटी, नार्थ सिटी, शक्ति नगर, हाउसिंग बोर्ड कालोनी पीजी हब बने हुए हैं। पीजी घरों में चल रहे हैं। कई पीजी में लकड़ी व फाइबर शीट से पार्टिशन किया गया है। एक-एक कमरे में 5-5 बेड लगाए गए हैं। फायर सेफ्टी नियमों का पालन भी नहीं किया गया है। एचएसवीपी के कार्यकारी अधिकारी दीपक घनघस ने कहा कि शहर के हूडा सेक्टरों में जितने भी पीजी हैं, वे अवैध हैंै। इनकी शिकायत सीएम विंडो पर भी हुई थी। इसके बाद कार्रवाई की गई।
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