तिल का इस्तेमाल कम करता है डिप्रेशन, हृदय और हड्डियों से जुड़े रोगों के लिए भी है लाभदायक

भारत में तिल का भोजन के रूप में एक खास महत्व है। लगभग हर घर में ही तिल का इस्तेमाल किया जाता है। सबसे ज्यादा तिल का इस्तेमाल मीठी चीजों को बनाने जैसे तिल के लड्डू, पापड़ी, इत्यादि बनाने में किया जाता है। दिल से जुड़ी बीमारियों के लिए तिल सबसे फायदेमंद है, क्योंकि इसमें मोनोसैचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो हमारे शरीर से कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम करता है। तिल का उपयोग खास तौर पर सर्दी के मौसम में किया जाता है, क्योंकि यह शरीर को गर्मी प्रदान करता है। तिल में सैसमीन एंटीऑक्सीडेंट पाया जाता है जो कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में मदद करता है|
तिल से होने वाले फायदेः
1. डिप्रेशनः
तिल में कुछ ऐसे विटामिंस और मिनरल्स पाए जाते हैं जो तनाव और डिप्रेशन को कम करने में सहायक होते हैं। मानसिक रोग जैसी गंभीर बीमारी से लड़ने में भी तिल मदद करता है। इसलिए हर इंसान को नियमित तौर पर थोड़ी मात्रा में तिल का सेवन करना चाहिए।
2. हृदय रोगः
तिल में कई तरह के खनिज लवण जैसे कि कैल्शियम, ऑक्सीजन, मैग्निशियम, जिंक, सेलेनियम, इत्यादि पाए जाते हैं। जो हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाते हैं उसे सक्रिय रूप से काम करने में मदद करते हैं।
3. हड्डियों को बनाता है मजबूतः
तिल में खास तरह का अमीनो एसिड और डाइटरी प्रोटीन पाया जाता है। जो बच्चों से लेकर हर उम्र के इंसान की हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है। इसके अलावा यह मांसपेशियों को भी मजबूत बनाता है। तिल के तेल से मालिश हड्डियों के दर्द से भी निजात दिलाता है।
4. सर्दी-खांसी से राहतः
सर्दी-खांसी होने पर तिल को मिश्री और पानी के साथ खाना चाहिए। इसके अलावा तिल के तेल में लहसुन गर्म करके, इस तेल को कान और नाक में डालने से भी सर्दी से राहत मिलती है।
5. त्वचा के लिए फायदेमंदः
तिल के तेल में पाए जाने वाली एंटी ऑक्सीडेंट प्रॉपर्टी चेहरे की त्वचा के लिए काफी लाभदायक होती है। इससे चेहरे में निखार आता है और चेहरे को जरूरी पोषण मिलता है, जिससे नमी बरकरार रहती है। तिल को दूध में भीगा कर उसका पेस्ट बनाकर लगाने से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और रंग भी साफ होता है।
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