मधु गोयल

किशोरावस्था यानी टीनएज में बेटियों के मन में कई जिज्ञासाएं होती हैं। उस समय पेरेंट्स को उसके साथ बैठकर उसके सवालों के तार्किक रूप से जवाब देने चाहिए। सवालों को हवा में न उड़ाकर उनके मन में चल रही हलचल को शांत करने का काम करें।
शारीरिक बदलाव
टीनएज लड़कियों की सबसे बड़ी परेशानी इसे ही माना जाता है। इस उम्र की लड़कियां अपने शरीर के बदलावों को लेकर बहुत सचेत हो जाती हैं। जिसके कारण वह कई बार सहज महसूस नहीं करती। हार्मोनल बदलाव होने से उनके मूड और व्‍यवहार पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसलिए मूड देखकर उनसे उनकी दिल की बात जानने की कोशिश करें।
पढ़ाई का प्रेशर
इस समय टीनएज लड़कियों में ज्‍यादा से ज्‍यादा स्‍कोर करने का जुनून या प्रेशर होता है। पेरेंट्स की भी लड़कियों से बेहतरीन प्रदर्शन की उम्‍मीदें होती हैं। टीनएजर बेटी को समझाएं कि उसे पढ़ना चाहिए और अच्‍छे माक्‍र्स लाने चाहिए लेकिन स्वास्थ्य सबसे पहले आता है।
आकर्षण
आपकी टीनएज बेटी को भी किसी के प्रति आकर्षण हो सकता है। यह उम्र होती ही ऐसी है कि इसमें विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण बढ़ता है। ऐसे में टीनएज लड़कियां डेटिंग पर जाने से भी नहीं हिचकिचातीं। इस उम्र में उनको पेरेंट्स के साथ की बजाय रोमांस और डेटिंग ज्‍यादा भाते हैं। आप उन्हें इस बारे में एजुकेशन देने में हिचकिचाएं नहीं। जान‍कारियां देना बहुत ज़रूरी है। एक मां इस दिशा में सबसे महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बुलीइंग
एक बड़ी समस्‍या टीनएजर लड़कियों के साथ बुलीइंग की भी होती है जो उन्‍हें बहुत परेशान करती है। अगर आपकी टीनएज बेटी इस समस्‍या से घिरी है तो उन्‍हें इसका सामना करने के लिए प्रोत्‍साहित करें और इसका विरोध करने का जज्‍़बा उनमें जगाएं।
पीरियडस के बारे में बताएं
पीरियड्स की शुरुआत किसी भी किशोर लड़की के जीवन में आने वाला सबसे बड़ा बदलाव है। सिर्फ और सिर्फ मां ही अपनी बेटी को इस बारे में बता सकती है। टीनएज बेटी को इस उम्र तक आते-आते, मां को इसके संबंध में पूरी जानकारी दे देनी चाहिए।

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