पिछले कुछ समय से सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में योग को महत्व दिया जा रहा है। आज कई तरह की बीमारियों को दूर करने में योगाभ्यास का सहारा लिया जाता है। यूं तो योगा में कई तरह के पाॅश्चर किए जाते हैं लेकिन कपालभाति एक ऐसा प्रणायाम है जो किसी संजीवनी बूटी से कम नहीं है।

अगर इसका नियमित रूप से अभ्यास किया जाए तो इससे कई तरह के लाभ प्राप्त होते हैं। तो चलिए जानते हैं कपालभांति करने और उससे होने वाले फायदों के बारे में-

करने की विधि
इस प्रणायाम का अभ्यास करने के लिए रीढ़ को सीधा रखते हुए किसी भी ध्यानात्मक आसन, सुखासन या फिर कुर्सी पर बैठें। इसके बाद तेजी से नाक के दोनों छिद्रों से साँस को यथासंभव बाहर फेंकें। साथ ही पेट को भी यथासंभव अंदर की ओर संकुचित करें। तत्पश्चात तुरन्त नाक के दोनों छिद्रों से साँस को अंदर खीचतें हैं और पेट को यथासम्भव बाहर आने देते है।

इस क्रिया को शक्ति व आवश्यकतानुसार 50 बार से धीरे-धीरे बढ़ाते हुए 500 बार तक कर सकते हैे, किन्तु एक क्रम में 50 बार से अधिक न करें। क्रम धीरे-धीरे बढ़ाए। ध्यान रखें कि सांस लेना नहीं है क्योंकि उक्त क्रिया में सांस अपने आप ही अंदर चली जाती है। कपालभाती प्राणायाम करते समय मूल आधार चक्र पर ध्यान केंद्रित करना होता है। इससे मूल आधार चक्र जाग्रत होकर कुंडलिनी शक्ति जागृत होने में मदद मिलती है।

लाभ ही लाभ

कपालभाति प्रणायाम की मदद से आप अपने शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकाल सकते हैं। जिससे शरीर भीतर से स्वच्छ होता है।

इस प्रणायाम से थकान कम होती है और शरीर में स्फूर्ति आती है।

कपालभाति प्रणायाम से ब्लड सर्कुलेशन ठीक होता है और ब्लड सर्कुलेशन ठीक होने के कारण आपका दिमाग अच्छी तरह काम करता है।

यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, जिससे वजन कम करने में सहायता मिलती है।

इसके अलावा इसके नियमित अभ्‍यास करने से कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी पेट से संबंधित समस्या भी दूर हो जाती है।



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