2032 तक दस ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्‍यवस्‍था बनने के लिए भारत को मजबूत आधारभूत संरचना विकसित करने की जरूरत है। देश के सम्‍पूर्ण आधारभूत संरचना क्षेत्र की निवेश आवश्‍यकताएं सार्वजनिक निवेश से पूरी नहीं हो सकतीं। इसलिए वास्‍तविक चुनौती सार्वजनिक क्षेत्र के साथ भागीदारी करके देश में पर्याप्‍त निजी निवेश लाना है।

केन्‍द्रीय वित्‍त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में आर्थिक समीक्षा 2018-19 की आर्थिक समीक्षा पेश की। आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि उद्योगों के विकास के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा मूल और आवश्‍यक हैं। पिछले कई वर्षों में भारत ने आधारभूत संरचना पर काफी निवेश किया है, लेकिन चुनौती आधारभूत संरचना क्षेत्र में पर्याप्‍त निवेश जुटाने की है। यह निवेश अनेक ट्रिलियन डॉलर का है।

निजी तथा सार्वजनिक क्षेत्र के सहयोग से विभिन्‍न नवाचारी उपायों से आधारभूत संरचना क्षेत्र में निवेश अंतर को पाटना होगा। आधारभूत संरचना क्षेत्र में निजी निवेश मुख्‍य रूप से पीपीपी रूप में आया है। यह क्षेत्र बीच में फंसी परियोजनाओं और विवादों/दावों के मामले में फंसी परियोजनाओंकी चुनौती से जूझ रहा है। इस क्षेत्र को व्‍यापक समाधान/निस्‍तारण विकल्‍प विकसित करना होगा। समय की आवश्‍यकता एक संस्‍थागत व्‍यवस्‍था करना है ताकि आधारभूत संरचना क्षेत्र में विवादों का समयबद्ध समाधान हो सके।



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