मेडिसीन ओवरडोज होने पर क्या करें? जानिए टिप्स

शरीर यदि अस्वस्थ रहे तो मेडिसीन की आवश्यकता पड़ती है।सही मात्रा में ली गयी मेडिसीन जहां स्वस्थ को ठीक कर देती है। वहीं इसका ओवरडोज यानी अधिक मात्रा में सेवन खतरनाक होता है, इससे जान भी जा सकती हैं।
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कब होता है ओवरडोज
– सावधानीपूर्वक मेडिसीन के सेवन करने के बावजूद कई बार अनजाने में मेडिसीन का ओवरडोज सेवन हो जाता है।
– डाॅक्टर अपने पर्चे पर दवा की मात्रा सेवन करने के लिए लिख देते हैं। कभी-कभी मरीज उन बातों को गौर न करके अपने अपनी मर्जी से मेडिसीन की अधिक मात्रा सेवन कर लेते हैं, ऐसे में ओवरडोज की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
– डाॅक्टरी परामर्श के बिना अपनी मर्जी दवा की मात्रा का सेवन करने से भी दवा ओवरडोज हो सकता है।
– डाॅक्टर द्वारा दी गयी दवा से लाभ न मिलने पर डाक्टर के परामर्श के बिना उस दवा को दोबारा इस्तेमाल कर लेने से भी दवा ओवरडोज हो सकता है।
– नीम हकीम को दवा की मात्रा के बारे में सही जानकारी नहीं दे पाते है।ऐसे में ओवरडोज की समस्या उत्पन्न हो सकता है।
– कुछ लोग जल्दी और अधिक फायदा लेने के चक्कर में अधिक मात्रा में मेडिसीन का सेवन कर लेते है और ओवरडोज का शिकार हो जाते हैं।
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ओवरडोज के लक्षण
संबंधित व्यक्ति को बेचैनी, घबराहट, मचली, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ, आंखों के सामने अंधेरा छाना, धुंधला दिखायी पड़ना, पसीना आना, नाड़ी तेज चलना, हृदय की गति का बढ़ जाना, आँखों की पुतलियां सिकुड़ जाना, अंटशंट बकना, दिमाग में धुंध छा जाना, विचार और आवाज में स्पष्टता न होना, बेहोशी छा जाना जैसे लक्षण दिखायी देते हैं।
ओवरडोज होने पर क्या करें ?
– यदि ओवरडोज का शिकार व्यक्ति बेहोश नहीं हुआ है तो उससे जल्द से जल्द पता करें कि उसने कौन-सी मेडिसीन खायी है और उसकी मात्रा क्या हैं ?
– मरीज के आस-पास पड़े गोली कैप्सूल के खाली रैपर, डाक्टर के नुस्खे वाला पर्चा आदि तुरंत अपनी जेब में रख लें।
– बेहोश हो जाने पर उसे खुली हवा में लिटा दें. उसके कपड़े ढ़ीले कर दें. उसके गर्दन को सीधा रखें. उसे सांस लेने में कठिनायी न हो।
– मरीज के बेहोश होने पर खुद भी अपना होश न गवाएं। धैर्य, तसल्ली और विवेक से काम लें।
– जल्द से जल्द एम्बुलेंस की व्यवस्था करें, इसके लिए निजी वाहन का इस्तेमाल भी कर सकते हैं।
– मरीज को उल्टी करवाने की कोशिश ना करें, इससे मरीज की तबीयत और भी खराब हो सकती है, साथ ही साथ समय की बर्बादी भी है।
– अस्पताल ले जाते समय मरीज द्वारा खाएं गये मेडिसीन के रैपर, बोतल, टेबलेट, कैप्सूल आदि जो भी हो साथ ले जायें। इससे डाक्टर को मरीज का तुरंत उपचार करने में सहायता मिलेगी और रोगी को शीघ्र लाभ मिलेगा।
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