केंद्र सरकार ने एक बार फिर बड़ी कार्रवाई करते हुए सीबीआइसी में कमिश्नर रैंक के 15 बड़े अधिकारियों की छुट्टी कर दी है।

केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड के प्रिंसिपल कमिश्नर, कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और डिप्टी कमिश्नर को सरकार ने तत्काल प्रभाव से अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त कर दिया है। सरकार ने केंद्रीय सेवा के सामान्य वित्त नियम के 56-जे के तहत इन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। जिन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई है उनमें प्रधान आयुक्त ड़ॉ. अनूप श्रीवास्तव,आयुक्त अतुल दीक्षित, आयुक्त संसार चंद, आयुक्त जी. श्री हर्षा, आयुक्त विनय ब्रिज सिंह, अतिरिक्त आयुक्त अशोक आर. महिदा, अतिरिक्त आयुक्त वीरेन्द्र कुमार अग्रवाल, उप आयुक्त अनरेश जैन, संयुक्त आयुक्त नलिन कुमार, अतिरिक्त आयुक्त एस. एस. पवाना, अतिरिक्त आयुक्त एस. एस बिष्ट, अतिरिक्त आयुक्त विनोद कुमार सांगा, अतिरिक्त आयुक्त राजू सेकर , उप आयुक्त अशोक कुमार असवाल, और अतिरिक्त आयुक्त मोहम्मद अल्ताफ शामिल हैं ।

इन अधिकारियों पर मुख्य तौर पर भ्रष्टाचार के आरोप है। इनमें घूसखोरी, फिरौती, कालेधन को सफेद करना, आय से अधिक संपत्ति, किसी कंपनी को गलत फायदा पहुंचाना जैसे आरोप शामिल हैं। इनमें से अधिकांश अधिकारी पहले से ही सीबीआई के शिकंजे में हैं। बीजेपी का कहना है कि सरकार भ्रष्टाचार को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

इससे पहले भी भ्रष्टाचार, कदाचार के लिए 12 वरिष्ठ आयकर अधिकारियों को सेवा निवृत्त कर दिया गया था । इनमें आयुक्त और संयुक्त आयुक्त स्तर के अधिकारी भी शामिल थे ।

मोदी सरकार ने ऐसे अधिकारियों की सूची बनाई है जिनकी उम्र 50 साल से अधिक है और जिन पर गंभीर भ्रष्टाचार के आरोप हैं और वो अपेक्षा के मुताबिक काम नहीं कर रहे हैं। केंद्र सरकार ऐसे अधिकारियों को नियम 56 के तहत सेवानिवृत्त कर रही है। मोदी सरकार ने इससे पहले अपने पहले कार्यकाल में ही ऐसे अधिकारियों के काम के आधार का मूल्यांकन कर चुकी थी।



from सम्पादकीय – Navyug Sandesh http://bit.ly/2Y0rMze
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