डिजिटल डेस्क, दिल्ली। अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साइबर अटैक के खतरे को देखते हुए नेशनल इमरजेंसी घोषित कर दी है। ट्रंप ने कल (बुधवार) शाम को कंप्यूटर नेटवर्क्स को विदेशी हमलों से सुरक्षित करने के लिए इससे जुड़े एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए। ट्रंप ने तर्क दिया है कि विदेशी ताकतें अमेरिका के कम्यूनिकेशन सिस्टम को हैक करना चाहती हैं, इसलिए हमें इस तरह का कदम उठना पड़ रहा है।  हालांकि जिस अटैक को लेकर अमेरिका को आशंका है उस संबंध में किसी देश या कंपनी का सीधे तौर पर जिक्र नहीं किया है, लेकिन ऐसी खबर है कि ट्रंप के इस कदम के पीछे चीन की दिग्गज टेलीकॉम कंपनी हुआवेई का हाथ हो सकता है। हुआवेई टेलीकॉम कंपनी दुनिया की सबसे बड़ी नेटवर्क सप्लाई करने वाली कंपनी है। हुआवेई कंपनी पर सवाल उठाए जाते हैं कि इस कंपनी को चीन की सेना और सुरक्षा एजेंसियां चलाती हैं। ट्रंप का आदेश होने के बाद  अमेरिकी कंपनी उन विदेशी टेलिकॉम कंपनियों का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी जिन पर राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालने की आशंका होगी। माना जा रहा है कि ट्रम्प प्रशासन इस कदम से चीनी कंपनी हुआवेई को निशाना बनाना चाहता है। कई देश आशंका जता चुके हैं कि चीन हुआवेई के प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल यूजर्स की जासूसी के लिए करता है। इसी के चलते कंपनी को अमेरिका के विरोध का सामना करना पड़ रहा है। ट्रंप प्रशासन लगातार कोशिश करता रहा है कि हुवावे कंपनी के इक्विपमेंट्स का इस्तेमाल अमेरिका के करीबी देश न करें। काफी हद तक अमेरिका को इस संबंध में सफलता भी मिली है। इससे पहले ट्रंप ने एक बिल पर हस्ताक्षर किए थे जिसमें चीन के हुआवेई और ZTE कॉर्प के उपकरणों के इस्तेमाल को बैन किया जाए।

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