डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) 22 मई को अपने नवीनतम रडार इमेजिंग अर्थ ऑबजर्वेशन सैटेलाइट RISAT-2B को लॉन्च करेगा। RISAT-2B पिछले रिसैट-श्रृंखला सैटेलाइट की तुलना में बहुत अधिक उन्नत है। इस सेटैलाइट के लॉन्च के लिए 25 घंटों का काउनडाउन मंगलवार सुबह 04.30 बजे शुरू हुआ। यह प्रक्षेपण बुधवार को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में पहले लॉन्च पैड से सुबह 5.30 बजे निर्धारित किया गया है। RISAT-2B को पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (PSLV-C46) अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। यह पीएसएलवी का 48वां मिशन है और 'कोर-अलोन' कॉन्फ़िगरेशन में 14वीं उड़ान होगी जहां ठोस स्ट्रैप-ऑन मोटर्स का उपयोग नहीं किया जाएगा। लॉन्च वाहन 615 किलो वजनी RISAT-2BR1 सैटेलाइट को 555 किमी की दूरी पर और 37 डिग्री के झुकाव पर कक्षा में स्थापित करेगा। RISAT सिरीज के इस सैटेलाइट का उद्देश्य कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन में सहायता प्रदान करना है। नए सैटेलाइट का बाहर से डिजाइन पुराने सैटेलाइट जैसा ही है। हालांकि इसका कॉन्फ़िगरेशन RISAT सीरीज के इससे पहले लॉन्च किए गए सैटेलाइट से अलग है। जानकारी के अनुसार नए सैटेलाइट में निगरानी और इमेजिंग क्षमताओं को बढ़ाया गया है। रिसैट के एक्स-बैंड सिन्थेटिक एपर्चर रडार (एसएआर) में दिन-रात के साथ-साथ सभी मौसम में निगरानी क्षमता होती है। रडार बादलों में तस्वीरें ले सकता है और 1 मीटर के रिज़ॉल्यूशन तक ज़ूम कर सकता है (इसका मतलब है कि यह दो वस्तुओं के बीच 1 मीटर की दूरी से अंतर कर सकता है)।  बता दें कि 2008 में मुंबई में 26/11 के आतंकी हमलों के बाद, रिसैट -2 सैटेलाइट जिसमें इजरायल में निर्मित किया गया आधुनिक रडार सिस्टम था, को सुरक्षा बलों की निगरानी क्षमताओं को बढ़ावा देने के लिए 20 अप्रैल, 2009 में लॉन्च किया गया था। 536 किमी की ऊंचाई से, उपग्रह 24x7 भारतीय सीमाओं की निगरानी करता है और सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठियों पर नज़र रखने में मदद करता है। सिन्थेटिक एपर्चर रडार पारंपरिक बीम-स्कैनिंग रडार की तुलना में फाइनर स्पेशियल रिजोल्यूशन प्रदान करने के लिए एक टार्गेट एरिया पर रडार एंटीना के मोशन का उपयोग करता है।

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