उच्चतम न्यायालय ने देश में हुए आम चुनावों के मतों की गिनती के दौरान वीवीपैट मशीनों की पर्ची को ईवीएम के आंकड़ों के साथ शत प्रतिशत मिलाने वाली याचिका को खारिज कर दिया। एक गैरसरकारी संगठन की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान सर्वोच्च अदालत ने कहा कि वृहद पीठ इस मामले में सुनवाई कर आदेश पारित कर चुकी है।

इससे पहले सात मई को शीर्ष अदालत ने 21 विपक्षी दलों की ओर से दायर समीक्षा याचिका खारिज कर दी थी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की अगुवाई में विपक्षी दलों की ओर से दायर याचिका में वीवीपैट पर्चियों के साथ ईवीएम के आंकड़ों का मिलान बढ़ा कर 50 फीसदी किये जाने की मांग की गयी थी। इधर, भाजपा ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि जो लोग ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं वो इससे पहले इसी प्रकिया से चुनाव जीत चुके हैं।

बीजेपी ने कहा कि अपनी हार को सामने देखकर वे ईवीएम पर सवाल उठा रहे हैं।उत्तर प्रदेश में कई जगहों पर ईवीएम में मिल रही गड़बड़ी की शिकायत पर चुनाव आयोग ने इसे खारिज किया है। आयोग ने एक बयान में कहा है कि ऐसी खबरें और आरोप बेबुनियाद हैं, विशेष रूप से ये आरोप गाजीपुर, चंदौली, डुमरियागंज और झांसी संसदीय क्षेत्रों के संबंध में है। बयान में कहा गया है कि इन सभी मामलों में ईवीएम और वीवीपैट राजनीतिक दलों के उम्‍मीदवरों के सामने ही सील कर दी गई हैं और इनकी वीडियोग्राफी भी की गई है। 

मतदान के समय मतदाताओं के मन में कोई शंका न रहे इसके लिए चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर ईवीएम के साथ वोटर वेरीफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल मशीन को लगाया था। जिसके जरिए मतदाता इस बात की पहचान कर सकते थे कि उनका वोट सही जगह पड़ा है या नहीं। इस बार ईवीएम की गिनती पूरी होने के बाद लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में पड़ने वाले हरेक विधानसभा क्षेत्र से वीवीपैट की कोई भी पांच मशीनों का चयन किया जाएगा और उनकी पर्चियों की गणना की जाएगी जिसके लिए हर हॉल में विशेष वीवीपैट गणना बूथ होंगे। पूरी तरह से पारदर्शी तरीके से अपनाई गई प्रक्रिया में  इस बात को सुनिश्चित किया जाएगा कि ईवीएम में डाले गए वोटों की गिनती सही है या नहीं।



from सम्पादकीय – Navyug Sandesh http://bit.ly/2VFtcxg
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