आजकल गर्मी का मौसम पूरी तरह अपने चरम पर हैं यह समय एक दम लू-थपडे का मौसम हैं इस मौसम में हमें यह पता लगता हैं गर्मी ने अपने कितने तेवर दिखाए हैं, वहीं गर्मी के मौसम में हमें प्यास भी बहुत ही ज्यादा लगती हैं लेकिन गर्मी के मौसम को देखते हुए हम पानी को छोडक़र कुछ ठण्डे पदार्थ पीने में बहुत ही ज्यादा रुचि दिखाते हैं, लेकिन क्या आप नहीं जानते लेकिन पानी की कमी तो पानी ही कर सकता हैं, इसकी जगह ओर कोई नहीं ले सकता।

और इस लिए इस से किडनी में पथरी की शिकायत बहुत ज्यादा हमारे सामने आई हैं साथ ही इसके साथ ही यूरिनरी ट्रेक इंफेक्शन और किडनी फेलियर के मरीज भी खूब  बढ़े हैं वही इस गर्मी मेें तापमान बढऩे से बुजुर्गों में प्रोस्टेट की समस्या भी हो रही हैं डॉक्टरों ने खूब पानी पीने की सलाह भी दी है।

तापमान अधिक होने से हमारा शरीर तेजी से पसीना निकालता हैं और शरीर का तापक्रम लगभग 37 डिग्री बनाए रखता हैं पसीने के साथ काफी पानी बाहर निकल आता हैं, हमारे शरीर में साठ फीसदी पानी है। जब कोशिका में 30 फीसदी तक पानी कम हो जाता हैं तो हमें डिहाइड्रेशन की शिकायत हो जाती है।

पानी की कमी पूरी करने के लिए हमारा शरीर मूत्र की सांद्रता भी बढ़ाता है यानी मूत्र में पानी कम होकर वह अधिक अम्लीय प्रकृति का हो जाता है। मूत्र गाढ़ा होने के साथ शरीर में मौजूद लवण का अवक्षेपण भी होने लगता है। इनके चलते ऑक्सजलेट, फॉस्फेट, यूरेट, यूरिक एसिड और अमीनो एसिड के छोटे-छोटे कण किडनी में इकठ्ठा होकर पथरी के रूप में संग्रहित हो जाते हैं पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को यूरीनरी इंफेक्शन का खतरा बहुत अधिक रहता है।

इनसे बचें:-

– 3 कप पानी कम कर देती हैं एक कप चाय

– सॉफ्ट ड्रिंक 50 फीसदी पानी कम करती हैं

-एक गिलास बीयर 2 गिलास पानी कम कर देती हैं

– 5 से 6 लीटर प्रतिदिन पानी पीएं

– 2.5 लीटर मूत्र प्रतिदिन करने का प्रयत्न करें

– 30 से 60 मिनट बाद पानी पीएं

भोजन करने के बाद हमारे शरीर में पानी:-

– वयस्क में 60 फीसदी पानी होता हैं

– 75 फीसदी शिशुओं का भार हैं पानी

– बुजुर्गों में 50 फीसदी पानी ही बचता हैं

– कोशिकाओं में 90 फीसदी पानी होता हैं

– 30 फीसदी कोशिका में पानी कम होने पर डिहाइड्रेशन

– 6.8 पीएच होता है मूत्र का (हल्का अम्लीय)



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