मीठी सी झप्पी रिश्तों को बदलने का माद्दा रखती है. यह बात अलग है कि उस के पीछे कोई साजिश या राजनीति न हो. कुछ अरसा पहले राहुल गांधी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झप्पी खूब खबरों में रही. संसद के मानसून सत्र के अविश्वास प्रस्ताव की बहस के दौरान राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी को जादू की झप्पी दी. राहुल ने भाषण के बाद यकायक मोदी की सीट के पास जा कर उन्हें गले लगा लिया. यह बात अलग है कि बाद में इस का राजनीतिकरण होने लगा. दोनों नेताओं की इस झप्पी ने 2013 में एक पार्टी के दौरान शाहरुख और सलमान की जादू की झप्पी की भी याद दिला दी. इस झप्पी ने फिल्म अभिनेता शाहरुख खान और हर दिल अजीज सलमान खान की 5 साल पुरानी कड़वाहट खत्म कर दी थी. आप जब किसी को गले लगाते हैं, तो सामने वाले को आत्मीयता और हर हाल में साथ देने का संदेश देते हैं. आप दोनों एकदूसरे से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं. इस से रिश्ता तो सुधरता ही है, दूसरे कई तरह के फायदे भी होते हैं. सिर्फ हग करना या गले लगाना ही काफी नहीं. अमेरिका में अनजान लोगों से भी मिलने पर मुसकरा कर ‘आप कैसे हैं’ पूछा जाता है. ऐसी छोटीछोटी बातों में 2 लोगों के बीच अच्छे एहसास जगते हैं और दोनों के चेहरों पर मुसकान आ जाती है. आज की दुनिया में परेशान और व्यस्त तो हर इंसान है पर ऐसे छोटेछोटे प्रयासों से थोड़ा सुकून हासिल किया जा सकता है.

आइए, जानते हैं कि शारीरिक और मानसिक सेहत के लिए गले लगना और लगाना कितना जरूरी है:

घटता है तनाव

जब एक दोस्त या परिवार का सदस्य किसी तरह के दुखदर्द से गुजर रहा हो तो उसे गले लगाएं. इस तरह किसी को स्पर्श करते हुए सपोर्ट देना उस व्यक्ति के तनाव को घटाता है.

बीमारियों से होता है बचाव

400 एडल्ट्स पर किए गए एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि वैसे प्रतिभागी जिन के पास बेहतर सपोर्ट सिस्टम था वे कम बीमार पड़े. यही नहीं ऐसे व्यक्ति बीमार पड़े भी तो उन्हें कम तकलीफ हुई.

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दिल की तंदुरुस्ती

गले लगाना आप के दिल की सेहत के लिए भी अच्छा है. एक अध्ययन के तहत शोधकर्ताओं ने 200 लोगों के एक गु्रप को 2 भागों में बांटा. पहले गु्रप में वैसे रोमांटिक पार्टनर थे, जिन्होंने पहले 10 मिनट तक एक- दूसरे का हाथ थामे रखा और फिर 20 सैकंड तक बैठे रहे. पाया गया कि पहले ग्रुप के लोगों के ब्लड प्रैशर लैवल और हार्ट रेट में दूसरे गु्रप की तुलना में अधिक कमी पाई गई. एक खुशनुमा रिश्ता आप के दिल की तंदुरुस्ती के लिए भी जरूरी है.

खुशी के लिए है जरूरी

औक्सीटोसिन हमारे शरीर में पाया जाने वाला एक हार्मोन है, जिसे वैज्ञानिक कभीकभी कैडल हारमोन भी कहते हैं, क्योंकि इस का लैवल तब बढ़ता है जब हम किसी को गले लगाते हैं, प्यार से स्पर्श करते हैं या फिर किसी के बहुत करीब बैठते हैं. औक्सीटोसिन हमारी खुशी को बढ़ाता है और तनाव में कमी लाता है. अध्ययनों में पाया गया है कि इस हारमोन का महिलाओं पर गहरा असर पड़ता है. जब वे अपने बच्चे को हग करती हैं तो इस का असर बढ़ जाता है. ओक्सीटोसिन ब्लड प्रैशर और स्ट्रैस हारमोन नोरेपिनफ्रीन में कमी लाता है.

डर कम होना

वैज्ञानिकों ने पाया है कि किसी अपने के प्यारभरे स्पर्श का एहसास लो ऐस्टीम वालों के मन में चिंता और भय की भावना घटाता है. एडल्ट इंसान ही नहीं, किसी बच्चे या फिर टैडीबियर जैसे किसी औब्जैक्ट को गले लगाना भी काफी असरकारी होता है.

संवाद का जरिया

ज्यादातर संवाद बोल कर या फेसियल ऐक्सप्रैशंस द्वारा बयां होते हैं. मगर गले लगाना संवाद का ऐसा जरिया है जिसे हर व्यक्ति समझ जाता है. इस गतिविधि से हम सामने वाले को एहसास दिलाते हैं कि वह अकेला नहीं है हम उस के साथ हैं.

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बढ़ता है आत्मसम्मान

बचपन के दिनों में मांबाप द्वारा हमें गले लगाना बताता था कि हम उन के लिए कितने अहम और प्यारे हैं. इसी तरह जब दोस्त और रिश्तेदार अथवा पार्टनर गले लगाता है तो भी हमारा दिल सुकून पाता है. हमें अपने महत्त्वपूर्ण होने का एहसास होता है. हमारा आत्मविश्वास बढ़ता है.

अच्छी तरह जीने के लिए दिन में कम से कम 4 हग जरूरी हैं. अच्छी ग्रोथ के लिए दिनभर में 12 हग जरूरी हैं. भारत के बड़े शहरों में और दूसरे बड़े देशों जैसे अमेरिका आदि में लोगों को इस एहसास से महरूम रहना पड़ता है. वे व्यस्त जिंदगी जीते हैं. अलग-अलग और तनहा रहते हैं, जबकि जितना ज्यादा हम दूसरों को गले लगाना सीखेंगे उतनी ही अधिक खुशी और सेहत हमें मिलेगी.

अध्ययनों में यह बात साबित हो चुकी है कि गले लगाने की आदत डिप्रैशन, घबराहट और तनाव दूर कर हमें अधिक सेहतमंद और प्रसन्न बनाती है. इस में वह जादू है जो 100 शब्दों से कहीं अधिक प्रभावशाली साबित होता है.

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