शनिवार सुबह कानपुर के निकट पूर्वा एक्सप्रेस के 12 डिब्बे आज पटरी से उतर गए। लेकिन इस भयावह हादसे के बाद भी न तो किसी यात्री की जान गयी और न ही अधिक यात्री घायल हुये। जबकि केवल उप्र में पुराने ट्रेन हादसों का ही इतिहास देखें तो प्रत्येक ट्रेन हादसा कुछ न कुछ यात्रियों की जान जरूर लेता था । इस बारे में जब रेल अधिकारियों से बात की गयी तो जानकारी मिली कि ''पूर्वा ट्रेन'' में देश में ही निर्मित अत्याधुनिक लिंक हॉफमेन बुश (एलएचबी) कोच लगे हुये थे जो मजबूत स्टेनलेस स्टील के बने होते है हल्के होते है और ट्रेन के पटरी से उतरने या टक्कर होने पर यह कोच एक दूसरे पर चढ़ते नहीं हैं। जबकि ट्रेनों के पुराने कोच (सीवीसी) पटरी से उतरने पर या दूसरी ट्रेन से टकराने से डिब्बे एक दूसरे पर चढ़ जाते थे और भारी जान माल का नुकसान उठाना पड़ता था । 

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