डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। चैत्र नवरात्रि इस बार 6 अप्रैल 2019 से मां काली के दिन शनिवार से आरम्भ हो रही है। इसमें महाकाली का शाबर मंत्र अत्यंत दुर्लभ और तीव्र प्रभावशाली होता है। चैत्र नवरात्रि में इस शाबर मंत्र को पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ विधि विधान पूर्वक जपकर सिद्ध कर लिया जाए तो साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं और साधक संपूर्ण सुख, सौभाग्य, ऐश्वर्य एवं धन-धान्य से परिपूर्ण हो जाता है। साथ ही साथ समस्त प्रकार की बाधाएं भी स्वतः ही दूर हो जाती है। आइए जानते हैं इस मंत्र के बारे में...  शाबर मंत्र  "सात पुनम कालका, बारह बरस क्वांर। एको देवि जानिए, चौदह भुवन द्वार।। द्वि-पक्षे निर्मलिए, तेरह देवन देव। अष्टभुजी परमेश्वरी, ग्यारह रूद्र सेव।। सोलह कला सम्पुर्णी, तीन नयन भरपुर। दशों द्वारी तू ही माँ, पांचों बाजे नूर।। नव-निधि षट्-दर्शनी, पंद्रह तिथि जान। चारों युग मे काल का कर काली कल्याण।।" इस शाबर मंत्र के द्वारा स्वयं का और जन मानस का कल्याण तथा परोपकार भी किया जा सकता है। साधक इस मंत्र के द्वारा किसी भी बाधाग्रस्त व्यक्ति जैसे भूत प्रेतबाधा, आर्थिक बाधा, नजर दोष, शारीरिक मानसिक बाधा इत्यादि को सरलता से हटा सकता है। प्रयोग विधि  :- इस मंत्र को सिद्ध करने के लिए महाकाली शाबर यंत्र, महाकाली का चित्र, कनेर का पीला फूल, भटकटैया का फूल, लौंग, इलायची, 3 नींबू, सिन्दूर, काले केवाच ( रत्ती या गुमची) के 108 बीज धूप, दीप, नारियल, अगरबत्ती आदि की जरुरत होगी। माता काली के मंदिर में या किसी एकान्त स्थान में इस साधना को सिद्ध किया जा सकता है। सबसे पहले स्नान आदि से निवृत होकर एक लकड़ी की चोकी पर लाल वस्त्र बिछाकर महाकाली का चित्र और यंत्र स्थापित करें। इसके बाद घी का चौमुखा दीपक जलाकर अपने गुरू तथा गणेशजी का ध्यान कर गुरू स्थापन मंत्र तथा आत्मरक्षा मंत्र का प्रयोग करें। फिर भोजपत्र पर निम्न चौंतिसा यंत्र का निर्माण करें फिर महाकाली यंत्र, महाकाली चित्र सहित चौंतीसा यंत्र का पंचोपचार या षोड़शोपचार से पूजन करें। पूजन के समय कनेर, भटकटैया के फूल को यंत्र चित्र पर चढ़ाएं, नारियल इलायची, पंचमेवा का भोग लगाएं, फिर तीनों नींबूओंं को काटकर सिन्दूर का टीका लगाकर अर्पित करें। इसके बाद हाथ में एक-एक केवाच के बीजों को लेकर उक्त मंत्र को पढ़ते हुए काली के चित्र के सामने चढ़ाते जाएं इस तरह 108 बार मंत्र जपते हुए केवाच के बीजों को चढ़ाएं। मंत्र जप पूर्ण होने पर उसी मंत्र से 11 बार अग्नि में आहुति करें और एक ब्राह्मण को भोजन कराएं तथा यथाशक्ति दान दक्षिणा भी दें। अब इस मंत्र का प्रयोग किसी भी इछित कार्य के लिए कर सकते हैं। प्रयोग नीचे लिखे अनुसार करें :- 1- भूत-प्रेत बधा निवारण के लिए :- हवन की राख से किसी भी भूत-प्रेत ग्रस्त रोगी को सात बार मंत्र पढ़ते हुए झाड़ दें तथा हवन के राख का टीका लगा दें फिर भोजपत्र पर चौंतिसा यंत्र को अष्टगंध से लिख कर तांबे के ताबीज में भर कर पहना दें तो भूत प्रेत बाधा सदा के लिए दूर हो जाता है। 2- शत्रु बाधा निवारण के लिए :- अमावस्या के दिन एक नींबू लेकर उस पर सिंदूर से शत्रु का नाम लिखकर महाकाली के इस मंत्र का उच्चारण करते हुए 21 बार 7 सुइयां चुभाएं फिर उसे श्मशान में ले जाकर गाड़ दें तथा उस पर शराब की धार चढ़ाएं ऐसा करने से 3 दिनों मे शत्रु बाधा समाप्त हो जाती है। 3- आर्थिक बाधा निवारण :- महाकाली यंत्र के सामने घी का दीपक जलाकर महाकाली शाबर मंत्र का 21 बार जाप 21 दिनों तक करने से आर्थिक बाधा समाप्त हो जाता है।

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