यह दुखद मामला महाराष्ट्र का है. मुंबई से तकरीबन 270 किलोमीटर दूर मालेगांव में एक शादी समारोह था. उस में न्योता दिए गए लोग जब शादी में पहुंचे तो वहां उन की उम्मीद के उलट उजाड़ सा माहौल था. न पंडाल, न बैंडबाजा और न ही घराती.

हैरान-परेशान लोगों का ध्यान वहां रखे एक ब्लैकबोर्ड ने खींचा जिस पर दुल्हन के पिता का एक हैरतअंगेज संदेश लिखा था कि ‘दहेज की लगातार मांग और आलीशान बेड पर असहमति की वजह से शादी कैंसिल कर दी गई है.’

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ऐसा लिखने वाले 5 बच्चों के एक पिता ने अपनी 22 साल की बेटी की शादी पेशे से बढ़ई लड़के के साथ करने की सोची थी. दोनों परिवारों ने तकरीबन एक साल पहले शादी तय की थी. पर शादी के दिन मामला बिगड़ गया.

बेड ने बिगाड़ी बात
लड़की के पिता ने ब्लैकबोर्ड पर उर्दू में लिखा था कि ‘इस सूचना के द्वारा मैं आने वाले सभी मेहमानों से माफी मांगता हूं कि आज सोमवार तारीख 15 अप्रैल, 2019 को मेरी बेटी के निकाह और दावत की मजलिस लड़के और उस के मांबाप की ओर से दहेज की बारबार मांग की वजह से और आलीशान बेड की मांग को ले कर उन के द्वारा अपशब्द बोले जाने से दुखी हो कर रद्द की जाती है. मैं आने वाले सभी मेहमानों से फिर से माफी मांगता हूं.’

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लड़के वालों ने इन सब बातों को दोनों परिवारों के बीच हुई गलतफहमी बताया पर यह शादी नहीं हो पाई. लेकिन लड़की के पिता के इस हिम्मत भरे कदम की लोगों ने जैम कर तारीफ की.

पर एक कड़वी हकीकत यह भी है कि आज 21वीं सदी में भी भारत दहेज का दंश झेल रहा है. इस के चलते लड़कियों की शादी करना एक बड़ी और गंभीर समस्या बनता जा रहा है. बहुत से लड़के वाले मुंह फाड़ कर अपने बेटे की कीमत लगाते हैं. अगर कहीं लड़का सरकारी नौकरी वाला हुआ तो फिर दहेज की रकम आसमान तक छूने लगती है. बहुत से लोग पहले तो कोई डिमांड नहीं करते हैं पर शादी का दिन नजदीक आतेआते उन का सुरसा रूपी मुंह बड़े से बड़ा होने लगता है. ऐसी खबरें आती ही रहती हैं कि मनमुताबिक दहेज नहीं मिलने पर बरात दुलहन लिए बिना ही लौटी. इस डर की वजह से बहुत से लड़की वाले अपनी इज्जत बचाने के लिए भारी कर्ज ले कर शादी में दहेज तो दे देते हैं पर उम्रभर बोझ सी जिंदगी गुजारने को मजबूर हो जाते हैं.

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दहेज देने के बाद भी लड़की अपनी ससुराल में खुश रहेगी इस की भी कोई गारंटी नहीं होती है. शादी में मनचाहा दहेज न मिलने पर बहुत से ससुराल पक्ष वाले अपनी बहू को परेशान करते हैं. उस के साथ मारपीट की जाती है. कई बार तो लड़की को मार दिया जाता है. ऐसे में एक पिता का दहेज न देने का फैसला तारीफ के काबिल है और साबित करता है कि उस के लिए बेटी का सुख सब से बढ़ कर है.

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