नई दिल्ली : कांग्रेस और आप पार्टी के बीच गठबंधन को लेकर चल रही कवायदों पर जब भी विराम लगे, लेकिन इससे पहले पार्टी के भीतर राजनीति खूब हो रही है। गठबंधन को लेकर पिछले एक महीने में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राहुल गांधी चार बार गठबंधन को लेकर मना कर चुके हैं, लेकिन प्रदेश प्रभारी पीसी चाको अभी भी गठबंधन के लिए कोशिश में लगे हैं। इससे जहां चुनावों की तैयारियों में नुकसान हो रहा है, वहीं विपक्षी पार्टियों को भी हमला करने का मौका मिल रहा है।

गौरतलब है कि प्रदेश अध्यक्ष शीला दीक्षित और तीनों कार्यकारी अध्यक्ष की राहुल गांधी के साथ बैठक हुई थी, उसमें भी राहुल गांधी ने कह दिया था कि दिल्ली कांग्रेस अगर गठबंधन नहीं चाहती है तो गठबंधन नहीं होगा। उसके बाद भी गठबंधन की कोशिशों में प्रदेश प्रभारी लगे रहे। दूसरी बैठक सभी पूर्व प्रदेश अध्यक्षों, पूर्व स्पीकर योगानंद शास्त्री और प्रदेश प्रभारी पीसी चाको की राहुल गांधी के साथ हुई। ​बैठक के बाद शीला दीक्षित ने बयान भी दिया था कि दिल्ली में आप के साथ गठबंधन के पक्ष में राहुल गांधी भी नहीं है।

लेकिन गठबंधन की कवायदें उसकी बात भी जारी रही। जो कांग्रेसी गठबंधन चाहते थे, वह यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलने पहुंच गए। उसके बाद शीला दीक्षित की मुलाकात सोनिया गांधी से भी हुई। तीसरी बार राहुल गांधी ने आईजी स्टेडियम में आयोजित जनसभा में भी राहुल गांधी ने दावा किया था कि वह दिल्ली में सातों सीट जीतेंगे।

चौथी बार प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला के साथ प्रेस कांफ्रेंस करते हुए एक सवाल के जवाब में भी कहा था कि दिल्ली यूनिट आप से गठबंधन नहीं चाहती है। अब चार-चार बार राहुल गांधी के मना करने के बाद भी पीसी चाको गठबंधन की संभावनाओं में लगे हुए हैं। यहां तक की रोजाना ऐसा कोई न कोई शकूफा भी छोड़ा जा रहा है, जिससे गठबंधन की चर्चा मीडिया में बनी रही।



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