आक्रामक रणनीति
हॉटस्पॉट की सीलिंग से राहत की उम्मीद
ऐसे वक्त में जब देश में कोरोना वायरस का संक्रमण सामुदायिक प्रसारण की दहलीज पर पहुंचता दिख रहा है; जनस्वास्थ्य रक्षा के लिए संक्रमण की दृष्टि से संवेदनशील इलाकों को सील करने की रणनीति नई उम्मीद जगाती है। हाल ही में उत्तर प्रदेश और दिल्ली में एक साथ यह तात्कालिक कदम उठाया गया। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने पंद्रह जिलों के संवेदनशील क्षेत्रों को हॉटस्पॉट मानते हुए सीमाएं सील कर दी हैं। यह अवधि पंद्रह अप्रैल तक तय की गई है। इसी तरह दिल्ली में बीस हॉटस्पॉट को सील किया गया है। इसी तरह मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र तथा हिमाचल में संवेदनशील इलाके हॉस्टस्पॉट घोषित किये गए हैं। देश में संक्रमण व मृत्यु का आंकड़ा जिस तेजी से बढ़ रहा था उसे देखकर लगने लगा था कि सरकारें कोरोना से लड़ाई में नई रणनीति अपना सकती हैं, जिसके फलस्वरूप हॉटस्पॉट का चयन सामने आया। दरअसल, हॉटस्पॉट का चयन कर आक्रामक रणनीति के साथ युद्धस्तर पर संक्रमण रोकने की राह राजस्थान के भीलवाड़ा ने दिखायी, जिसने संदेश दिया कि किसी इलाके को पूरी तरह सील करके कैसे इसके प्रसार को रोका जा सकता है। पिछले दिनों तब राजस्थान सरकार की चिंता बढ़ गई थी जब कपड़ा उद्योग के लिए मशहूर भीलवाड़ा में अचानक संक्रमण के 27 मामले आए थे। सरकार ने पूरे इलाके को सील करके लाखों लोगों की जांच की। इसके बाद नये मामले सामने नहीं आये। भीलवाड़ा ने पूरे देश को संदेश दिया कि कैसे संचारबंदी करके कोरोना के प्रसार को रोका जा सकता है। अब इसी रणनीति का प्रयोग उत्तर प्रदेश व दिल्ली में हो रहा है। मगर यहां यह तथ्य भी विचारणीय है कि पहले ही लॉकडाउन में लगी बंदिशों के बीच पूरी तरह घरों में बंद लोग किस तरह सीलिंग से सामंजस्य बैठा पाते हैं। दरअसल, सील होने पर लोग सब्जी, राशन, दूध व दवाइयों के लिए भी घर से बाहर नहीं निकल सकते। सरकार की ड्यूटी होती है कि लोगों तक आवश्यक चीजें पहुंचाए।
सवाल यह भी है कि क्या हमारी नौकरशाही व स्थानीय प्रशासन इस बात के लिए तैयार है कि सीलबंदी के बीच हर व्यक्ति की जरूरतों का सामान उनके घर तक पहुंचा सके? स्थानीय प्रशासन की लचर नीतियां किसी से छिपी नहीं हैं। ऐसे वक्त में जब देश के कोरोना योद्धा और नागरिक इन विषम हालात से जूझ रहे हैं तो उम्मीद की जानी चाहिए कि शासन-प्रशासन की कार्यशैली में भी बदलाव आएगा। नि:संदेह कोरोना प्रसार की स्थिति देश में चिंताजनक होती जा रही है। जैसे-जैसे तीन सप्ताह के लॉकडाउन की अवधि समाप्त हो रही है; कोरोना संक्रमण के मामलों में तेजी आ रही है। सरकार ने जांच का दायरा बढ़ाया है। चिंता की बात यह है कि बृहस्पतिवार को भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने भारत में कोरोना संक्रमण की व्यापक जांच के जो परिणाम बताये हैं, उसमें करीब छह हजार नमूनों में करीब दो फीसदी में कोरोना संक्रमण के लक्षण पाये गये हैं। दरअसल, यह टेस्टिंग सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी इलनेस के मरीजों को शामिल करके की गई थी, जिनके लक्षण कोरोना संक्रमण से मिलते हैं। ये वे मरीज होते हैं जिन्हें सांस संबंधी बीमारी होती है। इनमें चालीस मरीज ऐसे भी थे जो न तो विदेश गये थे और न कोरोना संक्रमितों के संपर्क में आये थे। ये जांच देश के 21 राज्यों के 52 जिलों में की गई थी। इनमें ज्यादातर पचास से अधिक उम्र के पुरुष थे। नि:संदेह रिपोर्ट चिंता का विषय है। रिपोर्ट हॉटस्पॉट इलाकों में कोरोना प्रसार की जांच तेज करने की मांग करती है। बहरहाल, सरकारों द्वारा हॉटस्पॉट चिन्हित करने के साथ यह भी विचार करने की जरूरत है कि गंभीर होती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए संक्रमण से मुक्त इलाकों में स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां सावधानी के साथ शुरू की जा सकती हैं, जिससे श्रमिकों का जीवनयापन हो सके।
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