ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
चंडीगढ़, 20 जनवरी
हरियाणा के गांवों को लालडोरे के दायरे से बाहर करने की योजना पर सरकार तेजी से आगे बढ़ रही है। करनाल जिले के सिरसी गांव में सर्वे ऑफ इंडिया की टीम के सहयोग से विकास एवं पंचायत विभाग द्वारा की गई मैपिंग सिरे चढ़ चुकी है। इस मैपिंग का नोटिफिकेशन भी विभाग कर चुका है। यही नहीं, इस गांव के करीब 400 परिवारों को टाइटल डीड भी इसी गणतंत्र दिवस यानी 26 जनवरी को दी जा सकती है।
विकास एवं पंचायत विभाग अपना काम पूरा करके राजस्व विभाग को रिपोर्ट भेज चुका है। अब राजस्व विभाग का काम शुरू हो गया है। राजस्व विभाग यह फार्मूला निकालेगा कि सिरसी गांव के लोगों की टाइटल डीड को कैसे कन्वेंस डीड में बदला जाएगा। दरअसल, गांवों की प्रॉपर्टी पर लोगों के कब्जे तो हैं, लेकिन उनके पास मालिकाना अधिकार नहीं हैं। खरीद-फरोख्त भी कागजों की बजाय कब्जे के आधार पर ही होती है।
ग्रामीण अपने घरों और प्लाटों पर बैंकों से ऋण भी नहीं ले पाते। इसीलिए सरकार ने गांवों की मैपिंग करवाने का निर्णय लिया ताकि कब्जाधारियों को उनका मालिकाना हक दिया जा सके। सिरसी गांव को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया। सिरसी गांव की तर्ज पर ही प्रदेश के सभी गांवों की मैपिंग होनी है। चरणबद्ध तरीके से यह काम होगा। इससे पहले अब राजस्व विभाग इसका हल निकालेगा कि सिरसी गांव के लोगों को मालिकाना हक कैसे दिया जाए। सिरसी के लिए होने वाले फैसले के हिसाब से ही प्रदेश के दूसरे गांवों में भी काम होगा। माना जा रहा है कि इसके लिये जल्द ही राजस्व विभाग के आला अधिकारियों की मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर तथा उपमुख्यमंत्री दुष्यंत सिंह चौटाला की अध्यक्षता में अहम बैठक हो सकती है। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग दुष्यंत के पास ही है। फिलहाल करनाल के डीसी को निर्देश दिए गए हैं कि वे गणतंत्र दिवस के मौके पर ग्रामीणों को टाइटल डीड देने का प्रबंध करें। यह प्रोजेक्ट लागू होने के बाद लालडोरा सीमा के भीतर जमीन की रजिस्ट्री हो सकेगी। पुश्तैनी जमीन अथवा उस पर बने ढांचों की खरीद-फरोख्त कर सकेंगे। इस जमीन पर बैंकों के माध्यम से कर्ज ले सकेंगे। राजस्व रिकार्ड में इंतकाल चढ़ेगा और कब्जाकार को मालिकाना हक मिलेगा। घरों को नंबर अलाॅट होंगे। सिरसी की सफलता के बाद सरकार ने 15 जिलों के 75 गांवों में इस योजना का विस्तार करते हुए मैंपिंग के आदेश जारी दिए हैं। करनाल, सोनीपत व जींद जिलों के गांव योजना में शामिल किए जाएंगे।
यह है लाल डोरा विवाद
संयुक्त पंजाब के समय लोगों को जहां जगह मिली वहां उन्होंने कब्जा करके रहना शुरू कर दिया। इसके बाद पहली नवंबर, 1966 को जब हरियाणा अस्तित्व में आया तो हरियाणा की अलग से मुरब्बाबंदी की गई और लोगों ने ग्रामीण क्षेत्रों में अपने आवास बनाने शुरू कर दिए। इन्हें लालडोरा की संज्ञा दी गई। लालडोरा सीमा में रहने वाले लोगों का कब्जा तो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है, लेकिन उनके पास इसके मालिकाना हक नहीं हैं। राज्य सरकार ने सर्वे ऑफ इंडिया के साथ एक एमओयू किया था। इसके तहत सिरसी गांव का ड्रोन से सर्वे करके बकायदा नक्शा तैयार किया गया। इस सर्वे में यह चिह्नित किया गया कि गांव में कहां निर्माण हैं और उनका मालिक कौन है।

“सिरसी गांव में किया गया पायलट प्रोजेक्ट सफल हो चुका है। इसके चलते यहां के लोगों को जल्द ही टाइटल डीड दे दी जाएगी। अगली कार्रवाई राजस्व विभाग करेगा। अब प्रदेश के अन्य जिलों में इस योजना का विस्तार किया जा रहा है। बहुत जल्द सभी जिलों के गावों को कवर कर लिया जाएगा।”
-सुधीर राजपाल, विकास एवं पंचायत विभाग के प्रधान सचिव

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