चंडीगढ़, 24 अप्रैल (ट्रिन्यू)
पंजाब विश्वविद्यालय के बॉटनी विभाग में आज शिवराम कश्यप ओरेशन अवार्ड लेक्चर में जेसी बोस फेलो (डीएसटी) सीसीएमबी, हैदराबाद के प्रो. इमरान सिद्दिकी ने ’21वीं सदी में भारत के संदर्भ में जीएम फसलों का अर्थशास्त्र : क्या बीता हुआ कल आने वाले कल को सूचित करेगा?’ विषय पर कहा कि जेनेटिकली मोडीफाइड (जीएम) फसलों की भारत में काफी गुंजाइश है, मगर इसके सामने कुछ चुनौतियां भी हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल भारत में सोयाबीन, कनोला, कपास और मक्का की जीएम फसलें उगायी जा रही हैं। कपास तो अब भारत में पूरी तरह से बीटी कॉटन ही उगायी जाती है, जोकि जीएम क्रॉप है। उन्होंने माना कि इसमें सफेद मक्खी की शिकायत है, लेकिन साथ ही कहा कि देश विश्व का नंबर वन कपास उत्पादक देश बन गया हैं मगर प्रति हेक्टेयर उपज में भारत सबसे पीछे है। उन्होंने कहा कि भारत में प्रति हेक्टेयर 500 किलो कपास पैदा होती है जबकि अमेरिका चीन व अन्य देशों में यह 1000 से 2000 किलो तक है।

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